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सटोरियों का रसूख बरकरार, पुलिस का अभियान फ्लाप 

Tue, 11 Oct 2016 10:32 PM IST
ब्यूरो /पीलीभीत
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सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट की ओर से जोरशोर से शुरू कराया गया सटोरियों के खिलाफ अभियान फ्लाप हो गया। पुलिस चिन्हित किए गए सटोरियों की धरपकड़ में भी सफल नहीं हो सकी। इसका सबूत सट्टा किंग का रसूख इस अभियान में भी खाकी पर भारी साबित होना है। उसकी गिरफ्तारी तो दूर पुलिस कहीं दबिश देने की भी हिम्मत नहीं जुटा सकी। नतीजतन कारोबार फिर पनपने लगा है।  
बता दें कि जिले में सट्टे का कारोबार बड़े पैमाने पर हो रहा है।  दो सौ से अधिक खाईबाड़ काम संभाल रहे है और रोजाना करीब बीस लाख रुपये का टर्नओवर है। पिछले पांच सालों में खादी और खाकी के संरक्षण में सट्टे का कारोबार दिनोंदिन बढ़ता चला गया। वर्तमान समय में हाइटेेक अंदाज में कारोबार को संचालित किया जा रहा है। पिछले दिनों सीओ सिटी निर्मल कुमार विष्ट ने सट्टे के खिलाफ सख्त दावे करते हुए अभियान की शुरूआत की थी। इसमें शहर के नामचीन सटोरियों को सूचीवद्ध किया गया। कुछ की धरपकड़ भी हुई, लेकिन बाद में वही हुआ। जिसके कयास लगाए जा रहे थे। समय बढ़ते -बढ़ते अफसरों की सख्ती कम होती गई और अभियान लापरवाही की भेंट चढ़ गया। पुलिस ने सट्टा किंग कहे जाने वाले मदीनाशाह और फीलखाना के रहने वाले सटोरियों की धरपकड़ को लेकर तमाम दावे किए, लेकिन कामयाबी नहीं मिल सकी। चर्चाएं यह भी रहीं कि पुलिस की सख्ती सटोरियों के राजनैतिक रसूख के आगे दम तोड़ गई। जिसके चलते हालात फिर पुराने ढर्रे पर आ गए है। 
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खुजली की धरपकड़ पर हुए हंगामे से पस्त हो गई कार्रवाई 
पुलिस की ओर से खकरा चौकी क्षेत्र के निवासी खुजली को बनाई गई सूची में टॉप थ्री में शामिल बताया गया था। इसकी गिरफ्तारी भी की गई थी, लेकिन पुलिस महकमा फजीहत में पड़ गया था। खुजली दबिश के दौरान छत से कूदकर घायल हो गया था। जिसके बाद परिवारीजनों ने थाने पहुंचकर पुलिस पर पिटाई का आरोप लगाया था। काफी हंगामा भी हुआ था। जिसके बाद पुलिस को थाने से ही केस दर्ज कर खुजली को छोड़ना पड़ा था। इसी हंगामे के बाद से पुलिस का अभियान पस्त होता दिखाई दे गया था। 
छिटपुट सटोरियों पर कार्रवाई कर लूटी गई वाहवाही 
पुलिस भले ही अभियान को सफल दर्शा रही हो, लेकिन हकीकत अफसरों के बयानों से बिल्कुल मेल नहीं खाती। सट्टा कारोबारियों को लेकर चलाए जा रहे अभियान पर आए दिन आरोप लगते रहे। सिर्फ छोटे सटोरियों की गिरफ्तारी करने में पुलिस आगे रही। बड़े कारोबारियों को कार्रवाई से दूर रखा गया। पकड़े गए सटोरियों ने भी खाकी पर यही आरोप लगाए। जिनके जवाब अधिकारियों के पास नहीं थे। 
शह देने वाले पुलिसकर्मियों को दिया अभयदान 
अपराध की रोकथाम को लेकर सख्त दावे करना मानों पुलिस अफसरों की आदत में शुमार हो चुका है। सट्टे के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान इसका उदाहरण भी सामने आया। पुलिस अधिकारियों ने सटोरियों को शह देने वाले पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर विभागीय कार्रवाई कराने के बयान तो दिए, लेकिन इस पर कोई काम नहीं किया गया। अफसरों ने स्वीकार तो किया लेकिन ऐसे पुलिसकर्मियों पर कोई सख्ती नहीं की गई। 
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सट्टे को लेकर लगातार पुलिस कार्रवाई कर रही है। पूरे जिले में सटोरियों की धरपकड़ कराई जा रही है। त्योहारों के चलते व्यस्तता होने पर कुछ फर्क जरूर पड़ा है। बड़े सटोरिए अभियान के दौरान जिले से बाहर निकल गए थे। दुबारा सख्ती कर सट्टे के कारोबार पर शिकंजा कसा जाएगा। 
निर्मल कुमार विष्ट, सीओ सिटी 
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