पीलीभीत। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर लाखों की हेराफेरी अब चलन बनता जा रहा है। इस पर शहर विधायक संजय गंगवार ने शासन से क्षेत्र की 26 ग्राम पंचायतों की शिकायत की है। विधायक की शिकायत पर पंचायतीराज निदेशक ने मंडलस्तरीय तीन अधिकारियों की कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।
शहर विधायक संजय गंगवार ने शासन से की शिकायत में अमरिया ब्लाक और ललौरीखेड़ा ब्लाक 11-11 और मरौरी ब्लाक की चार ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर गड़बड़ी एवं सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत की है। शिकायत में पिछले एक वर्ष के कार्यों की जांच कराने को लिखा गया है। विधायक की शिकायत पर पंचायतीराज निदेशक विजय किरन आनंद ने बरेली व मुरादाबाद के उपनिदेशक पंचायतीराज एवं स्वच्छ भारत मिशन लखनऊ के उपनिदेशक की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर टीएसी जांच के आदेश दिए हैं। पंचायतीराज निदेशक ने एक माह में जांच कर रिपोर्ट तलब की है। शासन स्तर से हो रही इस कार्रवाई में जांच कमेटी ने डीपीआरओ से पत्रावली तलब की हैं। इस पर डीपीआरओ ने सभी संबंधित एडीओ पंचायत से उनके अधीन आने वाली ग्राम पंचायतों की पत्रावली तीन दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
इन गांव की हुई है शिकायत
ब्लाक अमरिया- नवादा श्यामपुर, आसपुर, बिरहैनी, सद्दरपुर, परेवावैश्य, बल्लिया, धुंधरी, बगनेरा, बासखेड़ा, सिरसा और कैमोर।
ब्लाक ललौरीखेड़ा-डडिया भुसौड़ी, ढकिया नथा, नूरपुर, सिकलापुर, वार नवादा, भूड़ा मगरासा, भायपुर, सियाबाड़ी पट्टी, नौगवां पकडिय़ा, खेड़ा, अभयपुर, बरहा।
ब्लाक मरौरी-नावकुड, रूरा रामनगर, पुरानी पीलीभीत, खपरैल गौटिया उर्फ देशनगर, बेहरीखेड़ा व दहगला।
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ग्राम पंचायतों में प्रधान और पंचायत सचिवों की मिलीभगत से विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायतें आम हो गई हैं। जांच के बाद अक्सर कार्रवाई भी होती है। प्रधानों के अधिकार सीज होने से लेकर पंचायत सचिवों का निलंबन और रिकवरी की कार्रवाईयां भी हो रही हैं लेकिन गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहे इस गोरखधंधे में भेंट पूजा होने के बाद मामले को रफा दफा कर दिया जाता है। एक साल में एक दर्जन से अधिक पंचायत सचिव निलंबित होने के बाद न सिर्फ बहाल भी कर दिए गए बल्कि उन्हें ग्राम पंचायतें भी आवंटित कर दी गईं। इनमें से कई की जांच आज भी लंबित है।