पीलीभीत। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासकों की देखरेख में सर्वाधिक रकम खर्च करने वाली तीन ग्राम पंचायतों में हुए कार्यों की जांच कराई जाएगी। शासन के निर्देश मिलने के बाद डीएम ने जांच की जिम्मेदारी सीडीओ को सौंपी है।
पिछले साल 25 दिसंबर को समस्त ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसी के साथ तत्कालीन प्रधानों के डोंगल भी बंद कर दिए गए थे। ब्लॉकवार प्रशासकों की नियुक्ति कर विकास कार्य कराए गए थे। शासन ने प्रशासकों की नियुक्ति के दौरान सर्वाधिक धनराशि खर्च करने वाली ग्राम पंचायतों में हुए कार्यों की जांच करने के निर्देश दिए।
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार का आदेश मिलने के बाद डीएम पुलकित खरे ने कार्रवाई शुरू कर दी है। डीएम ने बताया कि शासनदेश के अनुसार जिले की तीन ग्राम पंचायत शेरपुर कलां, पूरनपुर देहात और दियोहना में सर्वाधिक खर्च हुआ था। इस पर यहां हुए कार्यों की जांच कराई जाएगी। जांच सीडीओ प्रशांत कुमार श्रीवास्तव को दी गई है।
शेरपुर में हुआ सर्वाधिक खर्च
जांच के दायरे में आईं तीन ग्राम पंचायतों सर्वाधिक खर्च शेरपुर कला में एक करोड़ रुपये हुआ है। इसके बाद दूसरे नंबर पर पूरनपुर देहात में 38 लाख जबकि दियोहना में 32 लाख रुपये खर्च कर विकास कार्य कराए गए थे।
सही से हुई जांच तो फंस सकते हैं जिम्मेदार
ग्राम पंचायतों में विकास कार्य के नाम पर घपलेबाजी कोई नई बात नहीं है। पहले भी शेरपुर कला समेत कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों में धांधली के आरोप लगने के बाद जांच कराई गई थी। इसमें गड़बड़ी भी निकलकर आई। मगर नोटिस देने के बाद कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई। इस बार भी प्रशासकों के कार्यकाल में हुए कार्यों पर सवाल उठाए जा चुके हैं। ऐसे में अगर निष्पक्ष ढंग से जांच हुई तो कई जिम्मेदारों का फंसना तय है।