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12 साल से पति से अलग रह रहीं लुबना खान की तलाक की अर्जी मंजूर

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पीलीभीत। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने पीलीभीत नगर की सिविल लाइन निवासी लुबना खान की पति के खिलाफ दी गई तलाक की अर्जी मंगलवार को मंजूर कर ली है। लुबना खान 12 साल से पति से अलग रह रही हैं। न्यायालय ने अपने निर्णय में दरकते पारिवारिक रिश्तों पर चिंता जताई है। यह भी कहा है कि देश में कॉमन सिविल कोड की जरूरत है।
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पीलीभीत नगर में सिविल लाइन की रहने वाली लुबना खान ने अपने पति अल्मोड़ा जिले के गंगोला निवासी मोहम्मद मुनीर खान के खिलाफ तलाक की अर्जी दायर की। अर्जी में कहा गया कि उनका निकाह तीन जून 2002 को हुआ है। उनका एक 14 वर्षीय पुत्र भी है। शादी के कुछ दिन बाद ही पति और ससुराल वालों ने दहेज के लिए उनका उत्पीड़न शुरू कर दिया। एक पुत्री भी हुई थी, जिसका उपचार ससुराल वालों ने नहीं कराया और उसकी जन्म के समय ही मृत्यु हो गई। न्यायालय में यह भी बताया गया कि पति ने 11 मार्च 2009 को दहेज की मांग के कारण उन्हें घर से निकाल दिया। उन्होंने घरेलू हिंसा का मुकदमा भी किया था। वर्ष 2020 में उन्होंने कोर्ट की शरण ली। पति ने कहा कि वह 13 अक्तूबर 2017 को मुस्लिम शरीयत के अनुसार तलाक दे चुके हैं। मामले की सुनवाई के दौरान लुबना ने बताया कि वह 12 वर्ष से अपने पति से अलग रह रही हैं। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान पाया तीन तलाक न देने का कानून सन 2019 में पारित हुआ है और तलाक पहले ही दी जा चुकी है। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश संजीव शुक्ला ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद पारित निर्णय में दरकते सामाजिक पारिवारिक रिश्तों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने देश में कॉमन सिविल कोड की आवश्यकता बताई है। क्योंकि मुस्लिम शरीयत के अनुसार पहले ही तलाक हो चुका है और यह दंपती 12 सालों से अलग रह रहा है। इसलिए न्यायालय ने लुबना खान की तलाक की याचिका मंजूर कर ली है।
प्रधान न्यायाधीश संजीव शुक्ला द्वारा निर्णय में पारित की गई टिप्पणी
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत एक प्रजातांत्रिक देश है फिर भी व्यक्तिगत कानून लागू है। अन्य प्रजातांत्रिक देश जैसे अमेरिका, कनाडा इत्यादि में व्यक्तिगत कानूनों को तवज्जो नहीं दी गई है और समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों पर लागू है। समान नागरिक संहिता समय की मांग है।
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