नवरात्र में जिमाने के लिए कन्या को एक दूसरे के घर ढूंढते दिखे लोग
नवरात्र व्रतों का परायण कन्याओं को भोज करने साथ किया जाता है, लेकिन समाज में बेटियों की लगातार घटती संख्या अब लोगों के लिए समस्या बनती जा रही हैं। शुक्रवार को लोगों को कन्याओं को अपने घर ले जाने के लिए इंतजार करना पड़ा तब लोगों को इसका एहसास भी हो सका। कुछ लोग यह भी कहते सुने गए कि यदि अब नहीं चेते तो आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
सनातन धर्म में कन्याओं को देवी का रूप माना गया है। बेटियों में शक्ति का एहसास दिलाने के लिए और उनके संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ही शायद शास्त्रों में नवरात्र के अंतिम दिन हवन पूजन के बाद कन्याओं को भोजन कराने का प्रावधान किया गया है। श्रद्धालुओं ने एक दिन पूर्व से ही मोहल्ले में घूमकर कन्याओं को आमंत्रित करना शुरू कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी सुबह कन्याएं मिलना मुश्किल हो गईं। इससे पहले एक समय ऐसा था जब एक कन्या यदि किसी घर में भोजन कर लेती तो उसे जूठी मानकर दूसरे घर नहीं बुलाया जाता था, लेकिन शुक्रवार एक-एक कन्या 10-12 घरों में भोजन कराया गया। समाज के जागरूक लोगों का कहना है कि ऐसा कन्याओं की लगातार घटती संख्या के कारण हो रहा है। लोगों का यह भी कहना था कि हम सरकार से कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने की उम्मीद तो करते हैं, लेकिन स्वयं इसकी पहल करने को तैयार नहीं हैं। आज भी घरों में बेटी से ज्यादा चाहत बेटे की है। हम एक दिन कन्या को देवी रूप में पूजते और पूरे साल कन्याओं की भ्रूण में ही हत्या करते हैं। यदि यही स्थिति रही तो वह दिन दूर नहीं जब कन्याओं के नाम की खुराक निकाल कर मंदिरों में दान करना पड़ेगी।