पीलीभीत। नेपाल की कई नदियां शारदा में मिलकर भारतीय क्षेत्र में तबाही मचा सकती है। पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश से नेपाल की जगबूड़ा और बमनी नदी उफान पर हैं। ये दोनों नदियां भारतीय सीमा में पहुंचने पर शारदा में मिल जाती है। नेपाल की नदियों में आई बाढ़ शारदा में मिलकर भारतीय क्षेत्र में कहर बरपा सकती है।
नेपाल में महाकाली (शारदा) नदी की चौड़ाई कम करने और कटान रोकने के लिए तटबंध बना दिया गया। मगर भारतीय क्षेत्र में बाढ़ रोकने के लिए हर साल रेत भरे बोरे लगा दिए जाते हैं।
शारदा नदी को नेपाल में महाकाली के नाम से जाना जाता है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों की कई नदियां और नाले शारदा में मिल जाते हैं। यूपी की सीमा में प्रवेश करने पर नेपाल की जगबूड़ा नदी का संगम नोमेंस लैंड पर होता है। इससे शारदा की धारा और तेज हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय पिलर 28 के समीप नेपाल की बमनी नदी भी शारदा में मिलती है। पिछले दिनों नेपाल में भारी बारिश हुई। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश होती है तो वहां का पानी महाकाली (शारदा) और जगबूड़ा व बमनी नदी का पानी मिलकर भारतीय इलाकों में तबाही मचा सकता है।
शारदा डैम आ सकता है चपेट में
शारदा नदी डैम के सामने नलडेंगा और नगरिया खुर्द कलां क्षेत्र में कटान करती हुई आगे बढ़ रही है। हालांकि डैम को शारदा के कहर से बचाने के लिए मार्जनल बांध बना हुआ है। वर्तमान में शारदा नदी मार्जनल बांध से मात्र 50 मीटर की दूरी पर बह रही है। जानकारों के मुताबिक यह शारदा का कटान जारी रहा तो नदी मार्जनल बांध को निशाना बनाकर शारदा सागर डैम तक पहुंच सकती है। अगर डैम के अस्तित्व को मामूली नुकसान भी हुआ तो इस इलाके में शारदा तबाही फैला सकती है।
नेपाल ने बनाया तटबंध, यहां रेत के बोरों से चलाया जा रहा काम
महाकाली (शारदा) नदी से बचने के लिए नेपाल सरकार ने अपने क्षेत्र में मजबूत तटबंध बना लिया। इसके बाद नेपाल क्षेत्र में महाकाली का प्रकोप थम गया। मगर भारतीय क्षेत्र में पहुंची शारदा के कहर से लोगों को बचने के लिए यहां बांस-बल्ली और रेत भरे बोरे लगाने के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। गभिया सहराई में शारदा सागर खंड द्वारा 12 करोड़ से अधिक की लागत से तीन ठोकरें बनाई गई हैं। नगरिया खुर्दकलां क्षेत्र में नदी का जल स्तर बढ़ने के बाद कटान की स्थिति में अस्थाई कुछ बचाव कार्य करवाए गए थे। इसके अलावा रमनगरा बुझिया क्षेत्र में नदी दाहिने किनारे की ओर बिजौरी खुर्दकलां के जंगल तक कटान करती हुई भीतर घुसने का प्रयास कर रही है। ये इलाके बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। इन इलाकों में हर साल करोड़ों रुपये पानी में बहाए जा रहे हैं, मगर किसी भी सरकार ने नेपाल से सीख नहीं ली। लेते हुए यहां पर भी कोई मजबूत स्थाई बाढ़ नियंत्रण कार्य या तटबंध बनाने का प्लान नहीं किया।
बाढ़ खंड द्वारा तीन बाढ़ प्रभावित स्थानों पर बचाव कार्य कराए जा रहे हैं। मात्र नहरोसा में कुछ कार्य शेष बचा है। रमनगरा बुझिया में कटान की स्थिति नहीं है। पूर्व वर्षों में नदी द्वारा छोड़ी गई भूमि पर खेती करने के साथ घर बना लेते हैं। अब नदी अपने पुराने स्थान से होकर बह रही है। कार्यों की गुणवत्ता पर पूरी निगाह रखी जा रही है। - शैलेश सिंह, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड