उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में दुष्कर्म पीड़िता के केस को छेड़खानी में दर्ज करना बरखेड़ा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर उमेश सिंह सोलंकी को महंगा पड़ गया। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इंस्पेक्टर पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
इसके बाद पुलिस ने इंस्पेक्टर सोलंकी पर एफआईआर दर्ज कर ली। हालांकि बरखेड़ा पुलिस इंस्पेक्टर पर एफआईआर दर्ज करने के मामले को देर शाम तक छुपाती रही। बरखेड़ा थाना क्षेत्र के खजुरिया पचपेड़ा गांव के दो युवकों पर 24 वर्षीय युवती ने 23 मई को दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था।
इस मामले में पीड़िता के परिवार वालों ने बरखेड़ा थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर उमेश सिंह सोलंकी को तहरीर दी थी, लेकिन तत्कालीन इंस्पेक्टर ने पहले तो रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की। तत्कालीन एसपी अभिषेक दीक्षित से युवती के परिवार वालों ने न्याय गुहार लगाई तो उनके निर्देश के बाद भी इंस्पेक्टर उमेश सिंह ने एफआईआर की धाराओं में खेल करते हुए दुष्कर्म की जगह सिर्फ छेड़छाड़ की धारा में रिपोर्ट दर्ज की थी।
इसके बाद पुलिस की ओर से इस कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। पीड़िता के परिवार ने दिल्ली पहुंचकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पूरे मामले की शिकायत की। मानवाधिकार आयोग ने जब मामले की अपने स्तर से जांच कराई तो केस सही पाया गया।
इसके बाद मानवाधिकार आयोग ने तत्कालीन इंस्पेक्टर उमेश सिंह सोलंकी पर रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए। वर्तमान इंस्पेक्टर कमल सिंह यादव की तहरीर पर तत्कालीन इंस्पेक्टर उमेश सिंह सोलंकी के खिलाफ धारा 166 ए के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पुलिस हालांकि तत्कालीन इंस्पेक्टर उमेश सिंह पर एफआईआर दर्ज करने के मामले को देर शाम तक दबाने में लगी रही। मगर जब बात चारों तरफ उजागर हो गई तो बहुत मुश्किल से पुलिस ने तत्कालीन इंस्पेक्टर पर एफआईआर दर्ज करने की बात कबूली।