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कागजों में दफन हुआ सोलर और कूड़ेदान घोटाला

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पीलीभीत। जिले की ग्राम पंचायतों में सोलरलाइट और कूड़ेदान खरीद के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ था। जिसे अब पूरी तरह दबाने का काम किया जा रहा है। कमीशन के चक्कर में खुले बाजार में पांच से दस हजार में मिलने वाली सोलरलाइट की कीमत बीस हजार रुपये दर्शाकर लाखों का गबन करने और इसी तरह पंद्रह सौ वाले कूड़ेदान में पांच गुना तक भुगतान करने की बात निकलकर सामने आई थी। जांच मे खुलासा होने पर जिला प्रशासन ने पहले सख्ती की और बाद में जांच कमेटी गठित कर मामला अभिलेखों में दफन कर दिया। वहीं अब अफसरों के चहेते ठेकेदार को एक बार फिर कूड़ेदान का ठेका दिए जाने की चर्चा जोरों पर हैं।
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सोलर लाइट के मुकाबले कूड़ेदान खरीद में हुए घोटाले को लेकर जिला काफी सुर्खियों में रहा था। इस मामले में डीएम वैभव श्रीवास्तव ने जांच के लिए दो कमेटी गठित की थीं। तहसील स्तर पर जांच के लिए अलग कमेटी का गठन किया गया। इससे तमाम तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया था, ठेकेदार के साथ कई अधिकारी अपनी गर्दन बचाने में जुट गए थे। तत्कालीन अफसरों की जांच में करीब सात माह पूर्व 1500 लागत वाला कूड़ेदान 5500 रुपये में खरीदने की बात सामने आई थी। मामले में इक्का दुक्का सचिवों पर कार्रवाई और प्रधानों को नोटिस जारी कर कूड़ेदान खरीद पर रोक लगा दी गई थी। इसी तरह पांच से दस हजार में मिलने वाली सोलर लाइट की कीमत बीस हजार रुपये दर्शाकर लाखों का गबन करा लिया था। इनमें कूड़ेदान मामले में डीएम वैभव श्रीवास्तव ने चार्ज लेते ही सख्त कार्रवाई का दावा किया था। जिला मुख्यालय के साथ ही तहसील स्तर पर जांच के लिए कमेटी गठित की गई, लेकिन अब तक इस प्रकरण की जांच पूरी नहीं हो सकी। लिहाजा, एक बार मामला चर्चा में आने पर गुरुवार को डीएम ने प्रकरण की जांच से जुड़े सभी अधिकारियों को तलब कर इसकी रिपोर्ट तलब की है।

अफसरों ने एक ही फर्म को दिया था ठेका
सूत्रों की मानें तो जिले की ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखने और सोलर लाइट लगाने का ठेका अफसरों के चहेते एक ठेकदार की फर्म को दिया गया था। ठेकेदार की देवीपुरा गोशाला के पास वेल्डिंग की दुकान भी है। यहां पुराने ड्रमों को पेंट कर नया दर्शाकर कूड़ेदान बनाने का खेल अब भी जारी है। इसके एवज में ठेकेदार मोटा कमीशन देता आ रहा है।
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... तो इसलिए नहीं बढ़ सकी जांच
कूड़ेदान खरीद घोटाले को लेकर जिला भले ही काफी समय से सुर्खियों में छाया है, इस प्रकरण की जांच भी लंबे समय से चल रही है। डीएम समेत कई अफसरों के ट्रांसफर हो गए, लेकिन जांच अब भी अधूरी है। इसकी मुख्य वजह ठेकेदार और कमीशनखोरी में फंसे कुछ अफसरों की ओर से सत्ताधारी नेताओं से कराई जा रही पैरवी बताई जाती है।

कूड़ेदान मामले की जांच के लिए गठित टीम में शामिल सभी अधिकारियों को तलब किया गया है। उनसे अब तक की गई जांच की जानकारी ली जाएगी। इस मामले में प्रधान, सचिव हो या अन्य कोई जिसकी भी मिलीभगत उजागर होगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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- वैभव श्रीवास्तव, डीएम
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