पीलीभीत। बराही रेंज के नवदिया बीट के जंगल की सीमा में मिले नर तेंदुए की मौत के मामले में वन विभाग के हाथ खाली हैं, सिर्फ वन्यजीव संघर्ष में तेंदुए की मौत साबित करने पर बल दिया जा रहा है। जबकि घटनास्थल पर ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जो संघर्ष को बयां कर रहे हों। इस सबसे इतर एक तथ्य यह भी है कि जिस सीमा में तेंदुए का शव मिला उसके डेढ़ किमी दायरे में शिकारियों का ठिकाना भी है। ऐसा तब है जबकि विभाग के आकड़ों में यह तथ्य दर्ज है, लेकिन इसको खंगालकर छानबीन करने पर कोई बल नहीं दिया जा रहा।
टाइगर रिजर्व बराही रेंज के नवदिया बीट की जंगल सीमा में तीन दिन पूर्व नर तेंदुए का शव मिला था। तेंदुए के शरीर में गर्दन व पैर में मामूली चोट के निशान मिले थे। अफसरों की मौजूदगी में शव को कब्जे लेकर पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आपसी संघर्ष में तेंदुए की मौत होने का विभागीय अफसरों ने दावा किया था। वन्यजीव का दांत लगने से तेंदुए की नस फट गई और सांस रुकने से उसकी मौत होने की बात कही गई। अफसरों के निर्देश पर घटनास्थल से एक किमी जंगल क्षेत्र व बाहर के इलाके में कांबिंग कर दूसरे वन्यजीव की तलाश की गई, लेकिन कोई साक्ष्य हासिल नहीं हो सका। वहीं घटनास्थल से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट शिकार की ओर इशारा कर रही है, लेकिन बावजूद वन्यजीव संघर्ष में तेंदुए की मौत साबित करने पर बल दिया जा रहा है। खास बात यह है कि घटनास्थल से डेढ़ किमी दायरे में पताभेजी गांव स्थित है। गांव में कई शातिर शिकारी भी हैं। जो पहले शिकार के मामले में लिप्त रह चुके है। अप्रैल 2017 में बाघ की हड्डियों समेत पताभोजी निवासी छोटे और पिपरिया भद्र निवासी कल्लू पकड़े भी जा चुके है। इसके अलावा कई अन्य भी शिकार के मामले में लिप्त रह चुके है। विभागीय आंकड़ों में यह दर्ज है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हो गया है कि तेंदुए की मौत आपसी संघर्ष में हुई है। मौत के पीछे शिकार के कोई तथ्य सामने नहीं आए हैं। वन्यजीव की लोकेशन ट्रेस करने के लिए कैमरे लगवाए गए है। लंबी दूरी तय करने के चलते लोकेशन ट्रेस में करीब सप्ताह भर लग सकता है।
-नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व