बन रहा रेस्क्यू सेंटर
बेहतर संरक्षण के चलते बाघों की संख्या में इजाफा होने के साथ सुरक्षा के मुद्दों पर भी चुनौती बरकरार रही। संख्या अधिक बढ़ने से बाघों का जंगल से बाहर निकलना बढ़ गया है। इससे हालात बिगड़ने लगे हैं। बाघों की मौतें भी होती रही हैं। पिछले वर्षों में बराही रेंज के साइफन इलाके में दो बाघों की शव मिले थे। इसके बाद अफसरों ने शासन स्तर पर पैरवी कर रेस्क्यू सेंटर को मंजूरी दिलाई। पूरनपुर क्षेत्र में रेस्क्यू सेंटर का निर्माण किया जा रहा है।
कम पड़ने लगा जंगल का दायरा
बाघों की संख्या बढ़ने से कई तरह की चुनौतियां भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक बाघ दिनभर में करीब 40 किलोमीटर चलता है। इसके अलावा चार किलोमीटर के दायरे में किसी दूसरे नर बाघ को डेरा नहीं जमाने देता है। ऐसे में लगातार बढ़ रही संख्या के चलते जंगल का दायरा कम पड़ने लगा है। जंगल के कई इलाकों के कोर एरिया की जमीन पर अवैध कब्जे भी बढ़ते जा रहे हैं। इसके अलावा हर साल नदी में बाढ़ आने से जंगल की जमीन का कटान हो रहा है। जिससे जंगल कम होता जा रहा है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जंगल में ग्रास लैंड और पानी की पर्याप्त व्यवस्था है। बाघों को पर्याप्त भोजन मिलता है। इससे बाघों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।