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पीलीभीत टाइगर रिजर्व: प्रकृति की गोद में बसी बाघों की दुनिया, ग्रास लैंड के बीच नहरों का जाल आया रास

Sat, 29 Jul 2023 06:57 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, पीलीभीत

सार

पीलीभीत टाइगर रिजर्व में छह वर्षों में बाघों की संख्या 24 से बढ़कर 65 से अधिक हो गई। पीलीभीत टाइगर रिजर्व को विश्व स्तरीय टाइगर एक्स टू अवार्ड से भी नवाजा गया है। यहां ग्रास लैंड के बीच नहरों का जाल बाघों के लिए मुफीद साबित हो रहा है।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेहतर ग्रास लैंड के बीच नहरों का जाल बाघ समेत वन्यजीवों के लिए मुफीद साबित हुआ। नौ वर्षों में पीलीभीत टाइगर रिजर्व की देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पहचान बन गई। वर्ष 2014 को पीलीभीत के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला। 

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इसके बाद बेहतर संरक्षण के चलते छह सालों में बाघों की संख्या 24 से बढ़कर 65 से अधिक हो गई। पीलीभीत टाइगर रिजर्व को विश्व स्तरीय टाइगर एक्स टू अवार्ड से भी नवाजा गया है। यहां बाघों की संख्या बढ़ने के पीछे जंगल का अनुकूल वातावरण और भोजन की पर्याप्त व्यवस्था बताई जा रही है।

73 हजार वर्ग हेक्टेयर में फैले पीलीभीत के जंगल को भले ही वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला, लेकिन ब्रिटिश काल में भी पीलीभीत के जंगल की अलग पहचान रही है। इंग्लैंड की कई नामचीन हस्तियां उस दौरान पीलीभीत के जंगलों में बाघों का शिकार करने के लिए यहां आती रहती थीं। टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां बाघों के संरक्षण के प्रयास शुरू किए गए। ग्रास लैंड बनाए गए। पानी के लिए जंगलों में जगह जगह जलाशय बनाए गए हैं।
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नहरें होने से बाघ समेत अन्य पशुओं को खाने-पीने की जंगल में कोई दिक्कत नहीं रहती है। बाघों को जंगल के शांत माहौल में विचरण करते देखा जा सकता है। इससे जंगल की सुंदरता भी बढ़ी है। इसका सकारात्मक असर पर्यटन पर भी पड़ा है। बाघ देखने के शौकीन सैलानियों की आमद हर साल बढ़ती जा रही है। अब एनटीसीए की रिपोर्ट में बाघों की संख्या और बढ़ने के आसार हैं।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व - फोटो : अमर उजाला

बन रहा रेस्क्यू सेंटर

बेहतर संरक्षण के चलते बाघों की संख्या में इजाफा होने के साथ सुरक्षा के मुद्दों पर भी चुनौती बरकरार रही। संख्या अधिक बढ़ने से बाघों का जंगल से बाहर निकलना बढ़ गया है। इससे हालात बिगड़ने लगे हैं। बाघों की मौतें भी होती रही हैं। पिछले वर्षों में बराही रेंज के साइफन इलाके में दो बाघों की शव मिले थे। इसके बाद अफसरों ने शासन स्तर पर पैरवी कर रेस्क्यू सेंटर को मंजूरी दिलाई। पूरनपुर क्षेत्र में रेस्क्यू सेंटर का निर्माण किया जा रहा है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व - फोटो : अमर उजाला

कम पड़ने लगा जंगल का दायरा

बाघों की संख्या बढ़ने से कई तरह की चुनौतियां भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक बाघ दिनभर में करीब 40 किलोमीटर चलता है। इसके अलावा चार किलोमीटर के दायरे में किसी दूसरे नर बाघ को डेरा नहीं जमाने देता है। ऐसे में लगातार बढ़ रही संख्या के चलते जंगल का दायरा कम पड़ने लगा है। जंगल के कई इलाकों के कोर एरिया की जमीन पर अवैध कब्जे भी बढ़ते जा रहे हैं। इसके अलावा हर साल नदी में बाढ़ आने से जंगल की जमीन का कटान हो रहा है। जिससे जंगल कम होता जा रहा है।
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पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जंगल में ग्रास लैंड और पानी की पर्याप्त व्यवस्था है। बाघों को पर्याप्त भोजन मिलता है। इससे बाघों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। 
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