टनकपुर बाईपास पर अधूरा पड़ा ओवरब्रिज। संवाद
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पीलीभीत। शहर में भारी वाहनों के आवागमन के लिए शासन के निर्देश पर 2016 में असम हाईवे से टनकपुर हाईवे के बीच 114 करोड़ की लागत से 11 किलोमीटर लंबे बाईपास का निर्माण शुरू कराया था। इसमें दो ओवरब्रिज का निर्माण भी शामिल है। जमीन अधिग्रहण के बाद सड़क का काम पूरा हो गया है मगर अभी दोनों ओवरब्रिज अधूरे हैं। पीटीआर ने ओवरब्रिज के नीचे खुद की जमीन बताते हुए आपत्ति लगा दी है। इससे पहले रेलवे द्वारा नक्शा नहीं देने से काम लटक गया था।
इस बाईपास में मैलानी और टनकपुर रेलखंड पर दो ओवरब्रिज निर्माण होना था। 62 करोड़ की लागत से सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी ने निर्माण शुरू कराया था, जबकि दोनों रेल खंडों पर ओवरब्रिज निर्माण की जिम्मेदारी राज्य सेतु निगम को दी गई थी। दोनों ओवरब्रिज का 14 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री ने शिलान्यास किया था। 607 मीटर लंबे एक ओवरब्रिज का 2680.60 लाख की लागत से निर्माण शुरू हो गया था।
इतनी ही लंबाई के दूसरे ओवरब्रिज का इतनी ही लागत से निर्माण शुरू हुआ था। निर्माण शुरू होने पर कार्यदायी संस्था ने ट्रैक के ऊपर पुल बनाने के लिए रेलवे में नक्शे के लिए आवेदन किया था। काम शुरू होने के बाद भी रेलवे की ओर से नक्शा नहीं मिलने के कारण निर्माण रोकना पड़ा था।
चार माह पहले नक्शा मिलने के बाद दोबारा संस्था ने काम शुरू कराया तो पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने अपनी जमीन बताते हुए निर्माण पर आपत्ति लगा दी। इससे फिर काम रुक गया। अब पीटीआर से एनओसी मिलने के बाद ही दोबारा निर्माण शुरू हो सकेगा।
‘दोनों ओवरब्रिज पर रेलवे से नक्शा मिलने के बाद काम शुरू कराया गया था। इसी दौरान पीटीआर के अधिकारियों ने खुद की जमीन बताते हुए निर्माण रुकवा दिया है। जनीन पीटीआर की है, इसकी जानकारी नहीं थी। अब अनुमति मिलने के चार माह में काम पूरा कर लिया जाएगा।’
- आरके श्रीवास्तव, सहायक अभियंता, राज्य सेतु निगम