पीलीभीत। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले ही भाजपा ने चुनावी शंखनाद कर दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ पीलीभीत पहुंचे थे। विकास की सौगात के साथ मुख्यमंत्री ने हिंदुत्व का जो राग छेड़ा था वह मतदान तक चला। इसका चुनावी नतीजों पर भी असर दिखा। राजनीतिक रैली और चुनावी सभाओं में भाजपा ने पूरी ताकत झोंकी। विपक्षी दल प्रचार के मामले में पहले दिन से आखिरी दिन तक पीछे रहे।
कांग्रेस के तीन उम्मीदवारों को चुनाव के दौरान स्टार प्रचारक तो छोड़िए, प्रांतीय नेता तक नहीं मिल पाए जबकि सभी उम्मीदवार प्रियंका गांधी के दौरे की उम्मीद लगाए थे। बसपा के प्रत्याशी पार्टी सुप्रीमो मायावती की चुनावी रैली का इंतजार करते रह गए। सपा के सुप्रीमो आए पर पीलीभीत विधानसभा सीट तक उनका दौरा सीमित रहा। पूरनपुर, बीसलपुर और बरखेड़ा क्षेत्र में कोई चुनावी सभा अखिलेश यादव की नहीं हुई।
चुनाव आचार संहिता आठ जनवरी को लगी थी लेकिन इससे पहले ही भाजपा चुनावी शंखनाद कर चुकी थी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनावी दौरे शुरू हो चुके थे। मुख्यमंत्री के एक दिवसीय दौरों का जो क्रम चला था, उसके क्रम में 30 दिसंबर को वह पीलीभीत आए थे। ड्रमंड कॉलेज के मैदान में उन्होंने यूं तो सरकारी कार्यक्रम के तहत तमाम बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया पर रैली में उनका अंदाज चुनावी था। इस मौके पर उन्होंने विपक्षी दलों पर वार किए और जनता से सवाल पूछ कर हिंदुत्व को उभारा था। उनका कहना था कि क्या सपा-बसपा की सरकार होती तो अयोध्या में राम मंदिर बनता। जवाब आया नहीं। जाहिर है कि वह अपने दौरे से हिंदुत्व को हवा दे गए थे। इस हवा को वोट की आंधी में बदलने का काम केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने किया। शहर में संजय गंगवार के पक्ष में रोड शो किया। अयोध्या के राम मंदिर और काशी कॉरिडोर को गौरव भरी उपलब्धि बताकर उन्होंने लोगों को भाजपा से जोड़ा था।
वहीं 21 फरवरी को मतदान से दो दिन पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आए। ड्रमंड कॉलेज के मैदान पर बड़ी चुनावी रैली करके उन्होंने आतंकवाद और कश्मीर सवाल पर हिंदुत्व का जोश भरा। रैली में भाजपा के साथ भगवा झंडे फहरा रहे थे। जाहिर हो गया था कि चुनावी प्रचार किस दिशा में जा रहा है। हिंदुत्व के सवाल पर उन्होंने लोगों को अपने साथ जोड़ा। सपा के अखिलेश यादव तथा प्रियंका गांधी को सवालों के घेरे में लिया था। शहर सीट पर इसके बाद तेजी के साथ धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण तेज हुआ और हारी हुई सीट जीत की ओर बढ़ गई। यह बात दीगर है कि जीत मामूली अंदर से ही हो सकी। राजनीतिक समीक्षक कहते हैं अगर चुनावी रैली और जनसभाओं में भाजपा आगे नहीं होती तो एक सीट खतरे में पड़ जाती। बीसलपुर, पूरनपुर और बरखेड़ा में भी जीत का अंतर घटता। इस तरह से जीत की लहर नहीं चलती। भाजपा के लिए 2017 का इतिहास दोहराना मुश्किल होता।
कब किसके हुए दौरे
पीलीभीत जिले में नेताओं के चुनावी दौरे
भाजपा-
02 फरवरी- केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आए, रोड शो किया
09 फरवरी- उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा बिलसंडा और पूरनपुर पहुंचे
18 फरवरी- केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा, कुर्मी और किसान बहुल क्षेत्र में रहे
19 फरवरी-बीसलपुर और पूरनपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभा की
20 फरवरी- केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर पहुंचे, 21 फरवरी को भी किया चुनावी प्रचार
21 फरवरी- बीसलपुर और बरखेड़ा में भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने जनसभाएं कीं
21 फरवरी- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पीलीभीत शहर में चुनावी जनसभा की
बसपा-
पीलीभीत जिले में न कोई दिग्गज आया न ही बसपा सुप्रीमो की रैली हुई। बरेली में सात फरवरी को बसपा सुप्रीमो मायावती ने चुनावी रैली की थी जिसमें जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों से लोग शामिल हुए थे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर वह जिले में दौरा करती तो तस्वीर कुछ और होती।
सपा-
19 फरवरी- सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव आए। ड्रमंड कालेज मैदान में चुनावी रैली की। जिले भर के लोग शामिल हुए लेकिन असली फायदा तब जब वह प्रत्येक विधानसभा सीट पर उम्मीवारों के पक्ष में रैली को संबोधित करते। जिले की चारो सीटों पर सपा दूसरे स्थान पर रही।
कांग्रेस
21 फरवरी- कांग्रेस के स्टार प्रचारक इमरान प्रतापगढ़ी न्यूरिया आए। बरखेड़ा के उम्मीदवार को पक्ष में सभा को संबोधित किया।