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Pilibhit News: बंदरों के हमले में छत से गिरे बुजुर्ग की इलाज के दौरान मौत

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गजरौला कस्बे में बैठा बंदरों का झुंड संवाद
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गजरौला। छत पर कपड़े डालने गए गांव बिठौरा कलां निवासी बुजुर्ग पर अचानक से बंदरों ने हमला कर दिया। लड़खड़ाकर छत से गिरे बुजुर्ग को परिजनों ने आनन-फानन में पीलीभीत के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी मौत हो गई।
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थाना गजरौला क्षेत्र के गांव बिठौरा कला निवासी पप्पू शर्मा ने बताया कि उनके पिता कालीचरन (75) पुत्र भजन लाल रविवार सुबह करीब सात बजे छत पर कपड़े डालने गए थे। अचानक बंदरों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। इससे वह छत से नीचे आ गिरे। मुंह और नाक से खून बहने लगा। आनन-फानन में उन्हें पीलीभीत के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
गौरतलब है कि गजरौला कस्बे में भी कई लोग बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं। क्षेत्र के गांव पिपरिया भजा में भी बंदरों का आतंक है। एक माह पूर्व पिपरिया निवासी जुलेखा पत्नी ननकू बख्श को बंदरों ने छत से नीचे गिरा दिया। इससे उनका एक हाथ और एक पैर टूट गया था।
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आतंक का पर्याय बने बंदर, मासूमों समेत कई को कर चुके हैं घायल



- ग्रामीण बोले- बच्चों के लिए अधिक खतरा, शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान



संवाद न्यूज एजेंसी



गजरौला। कस्बे में बंदरों का आतंक कोई नया नहीं हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सालों से बंदर आबादी क्षेत्र में दहशत का पर्याय बने हुए हैं। अब तक कई लोगों को घायल कर चुके हैं। सबसे अधिक परेशानी बच्चों को लेकर है। कई बच्चे बंदरों के हमले में जख्मी हो चुके हैं। शिकायत के बाद भी जिम्मेदारों की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा।



गजरौला में बंदरों के हमलों की बात करें तो संख्या काफी अधिक है। कस्बे में पिछली साल अगस्त में मासूम बच्ची कुमकुम पर बंदरों ने झपट्टा मारा था। छत से गिरकर गंभीर घायल हुई बच्ची का बरेली के निजी अस्पताल में कई दिन उपचार चला था। नवंबर में 12 वर्षीय करन बंदरों के हमले में छत से नीचे गिरकर घायल हो गया था।



दिसंबर में कस्बे के ही सियाराम को बंदरों ने काट लिया था। इसके अलावा कस्बा के ही आदित्य, सृष्टि को भी बंदरों ने हमला कर घायल कर दिया था। ग्रामीणों के अनुसार, दो माह पूर्व कस्बा निवासी नौ वर्षीय अरशद पुत्र सलीम पर बंदरों ने हमला कर मांस निकाल लिया था। वहीं पांच वर्षीय मोहम्मद साहिल पुत्र इनासत अली, आसमां पत्नी इनासत अली, 16 वर्षीय संध्या पुत्री रामप्रताप, 11 वर्षीय प्रशांत पुत्र प्रेमशंकर भी बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं।



ग्रामीणों के अनुसार, बंदर घर के ऊपर घूमते हैं। रास्ते में आते-जाते समय लोगों पर हमलावर होते हैं। डिप्टी रेंजर शेर सिंह ने बताया यह मामला विभागीय कार्य क्षेत्र में नहीं आता है। नियमानुसार प्रधान के स्तर से पशु चिकित्सालय में पत्राचार कर आगे की प्रक्रिया की जा सकती है।
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