पीलीभीत। विकास की रफ्तार को गति देने के लिए शासन ने नए वित्तीय वर्ष में जिला योजना का रोडमैप तो तैयार कर लिया, मगर कोरोना के चलते उसे अब तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका। शासन ने वर्ष 2020-21 की जिला योजना के लिए दो अरब 93 करोड़ का बजट प्रस्तावित कर दिया है। विभिन्न विभागों ने अपने प्रस्ताव बनाकर भी भेज दिए हैं, मगर कोविड-19 के चलते जिला योजना की बैठक नहीं हो पाई। इससे जनपद में विकास कार्य शुरू नहीं कराए जा सके। एक तरह से विकास का पहिया थम सा गया है, क्योंकि अब तो बारिश शुरू हो गई है और इस मौसम में दो-तीन महीने तक कई काम नहीं हो सकते।
विकास को गति देने के लिए हर साल जिला योजना की बैठक वित्तीय वर्ष के प्रारंभ में ही होती है। उसके बाद शासन जरूरत के हिसाब से गठित जिला योजना में बजट तय करता है। इस बजट से विभिन्न विभागों की विकास योजनाओं और नए कार्यों को अंजाम दिया जाता है। चालू वित्तीय वर्ष में जिला योजना के अंतर्गत विकास कार्यों को धरातल पर उतारने के लिए शासन ने दो अरब 93 करोड़ 57 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। जिला योजना की इस धनराशि से मनरेगा, पोषण, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, पंचायतीराज, श्रम, सिंचाई, कृषि, वन, पीडब्ल्यूडी समेत विभिन्न विभागों की विकास योजनाओं को मूर्त रूप दिया जाना है। साल की शुरूआत में ही शासन से पत्र मिलने के बाद जिला स्तर पर विभागों को पत्र लिखकर प्रस्ताव मांगें जाने की तैयारी शुरू कर दी गई। इस पर संबंधित विभागों ने प्रस्ताव बनाकर उपलब्ध भी करा दिए। प्रस्ताव मिलने के बाद प्रभारी मंत्री से अनुमोदन कराकर योजना के तहत काम कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ती, इस बीच कोरोना ने दस्तक दे दी। इसके चलते जिला योजना की अब तक बैठक नहीं हो सकी। अधिकांश विभाग कोरोना से जुड़े कामों में व्यस्त हो गए। जिला योजना की बैठक न होने से विकास का पहिया थम गया है। जिला योजना की बैठक कब होगी, अधिकारी इस बारे में भी कुछ स्पष्ट बताने की दशा में नहीं है।
इस वर्ष 28 करोड़ की हुई बढ़ोत्तरी, मगर खर्चा और बढ़ेगा
शासन ने वर्ष 2020-21 के लिए बजट में 28 करोड़ 38 लाख रुपये का इजाफा किया है। बीते साल जिला योजना केे लिए दो अरब 65 करोड़ 19 लाख रुपए दिए गए थे। गत वर्ष शासन से मिली धनराशि का शत प्रतिशत उपभोग कर जनपद में कुछ विकास कार्य कराए गए थे। वहीं सड़क एवं पुल निर्माण में देरी 10 फीसदी खर्चा बढ़ सकता है।
मनरेगा में भी बढ़ेगा बजट
पिछले साल की जिला योजना में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में 56.31 करोड़ था। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते बाहर से 25 हजार से ज्यादा प्रवासी जनपद में आ चुके हैं। सरकार की योजना इन्हें मनरेगा से रोजगार उपलब्ध कराने की है। इसके लिए मनरेगा बजट में 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। सरकार का जोर सड़क एवं पुल निर्माण के जरिए बाहर से आए प्रवासियों को रोजगार देने का है। पीडब्ल्यूडी को इसके लिए मनरेगा से जोड़ा गया है। हालांकि पीडब्ल्यूडी इंजीनियर अभी तक सर्वे करके यह नहीं बता पाए हैं कि वह मनरेगा में किस तरह निर्माण कार्यों के जरिए अधिक से अधिक रोजगार दिला सकते हैं।
अनावश्यक कामों में होगी कटौती
जिला योजना में पहले कुछ अन्य विभागों को भी बजट आवंटित कर दिया जाता था। मगर, इस बार कोरोना के चलते सरकार के पास बजट की कमी है। इसलिए कुछ कम उपयोगी या न के बराबर उपयोगी विभागों के बजट में कटौती की जा सकती है। इस पर मंथन चल रहा है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय तभी हो पाएगा, जब जिला योजना की बैठक होगी। अभी बैठक की तारीख तय होनी बाकी है।
सामुदायिक व्यय के लिए धनराशि हो रही खर्च
कोविड-19 के चलते इस बार जिला योजना की बैठक नहीं होने पर अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी नरेंद्र यादव ने बताया कि जिला योजना में मिली धनराशि सामुदायिक व्यय मनरेगा, पेंशन संबंधी मद में धनराशि खर्च की जा रही है।
शासन के निर्देश पर जिला योजना के तहत विभागों से प्रस्ताव मांगे गए थे। विभागों से प्रस्ताव प्राप्त हो गए हैं, मगर कोविड-19 के चलते अभी जिला योजना की बैठक नहीं हो सकी है। शासन के निर्देश पर ही बैठक कराने पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - श्रीनिवास मिश्र, सीडीओ