पीलीभीत। गजरौला थाना क्षेत्र में मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और घर में घुसकर हमला करने के आरोपी रामचंद्र को स्पेशल कोर्ट एससी/एसटी एक्ट ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
विशेष न्यायाधीश राम किशोर चतुर्थ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा।अभियोजन के अनुसार, वादी लालाराम ने 16 मार्च 2017 को थाना गजरौला में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि वह गांव पटपरा में अजय कुमारी के घर इंजन ठीक कर रहा था। इसी दौरान पड़ोसी रामचंद्र ने कथित रूप से जातिसूचक शब्द कहे और लाठी-डंडों से मारपीट की। आरोप था कि लालाराम के घर भागने पर आरोपी उसके घर में घुस गया और उसकी पत्नी पार्वती के साथ भी मारपीट की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वादी सहित कई गवाह न्यायालय में पेश किए। मेडिकल रिपोर्ट में चोटें साधारण प्रकृति की पाई गईं।
वहीं, बचाव पक्ष ने घटना को झूठा बताते हुए दावा किया कि वादी को गन्ने की ट्रॉली भरते समय चोट लगी थी और बाद में फर्जी मेडिकल बनवाकर मुकदमा दर्ज कराया गया। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि वादी का भाई पहले भी कई लोगों के खिलाफ फर्जी एससी/एसटी एक्ट के मुकदमे दर्ज करा चुका है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने रामचंद्र को सभी आरोपों से दोषमुक्त करार देते हुए फैसला सुनाया। संवाद