जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में सपा की प्रत्याशी एवं पूरनपुर विधायक
पीतमराम की पुत्रवधू आरती देवी निर्वाचित घोषित की गई हैं। उन्होंने भाजपा
(मेनका गुट) की आशा देवी को 24 मतों से हराकर यह जीत हासिल की हैं। आरती को
29 मत मिले, जबकि प्रतिद्वंदी आशा देवी मात्र पांच मत हासिल कर सकीं। जिला
पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतने पर सपा ने जश्न मनाया और आतिशबाजी कर मिठाई
बांटी। वहीं मेनका गुट ने सदस्यों को डरा धमका कर उनका वोट जबरिया डलवा
लेने आदि का आरोप लगाते हुए कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन किया।
जिला
पंचायत अध्यक्ष पद चुनाव में सपा से पूरनपुर विधायक पीतमराम की पुत्रवधू
आरती देवी और भाजपा (मेनका गुट) की ओर से पूर्व जिला पंचायत सदस्य मलखान
सिंह की पत्नी आशा देवी के बीच मुकाबला था। गुरुवार को कलेक्ट्रेट में
मतदान सुबह 11 बजे से तीन बजे तक चला। इसके बाद परिणामों की घोषणा की गई,
जिसमें सपा की आरती देवी को 29 और आशा देवी को मात्र पांच मत मिले। आरती
देवी 24 वोटों से जीतीं।
इस दौरान चुनाव को लेकर कलेक्ट्रेट में काफी
गहमागहमी रही। कई बार दोनों पार्टियों के समर्थकों के बीच नोकझोंक भी हुई।
कई जिला पंचायत सदस्य सहायक लेकर मतदान करने पहुंचे, जो पार्टियों के बीच
चर्चा का विषय रही। जिलाधिकारी मासूम अली सरवर ने आरती देवी को जीत का
प्रमाण पत्र दिया। इसके बाद सपाइयों ने नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष
आरती देवी के घर पहुंचकर घंटों आतिशबाजी की और मिठाइयां बांट कर खुशी का
इजहार किया।
जिला पंचायत की सातवीं अध्यक्ष बनी आरती
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतकर सपा की आरती देवी ने जिले की सातवीं और तीसरी महिला अध्यक्ष होने का गौरव हासिल किया है। आरती से पूर्व रुकैइया और अनीता वर्मा महिला अध्यक्ष रही हैं जबकि पोथीराम गंगवार पहले अध्यक्ष बने थे।
1994-95 में कल्याण सिंह की सरकार में जिला परिषद को जिला पंचायत का दर्जा दिया गया था। उस समय पोथीराम गंगवार जिला परिषद के अध्यक्ष थे। जिला परिषद से जिला पंचायत बनने पर पोथीराम गंगवार ही पहले अध्यक्ष रहे। हालांकि कुछ समय बाद ही चुनाव हुआ जिसमें बुद्धसेन वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए।
इसके बाद वर्ष 2000 में गुरदयाल को अध्यक्ष चुना गया। गुरदयाल सिंह के बाद वर्ष 2005 में बुद्धसेन वर्मा की पत्नी अनीता वर्मा विजयी रहीं। वर्ष 2010 में भी अनीता वर्मा चुनाव जीतीं लेकिन प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से उन्हें हटाकर राज्यमंत्री हाजी रियाज अहमद की पुत्री रूकैइया आरिफ जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हुई।
अब संपन्न हुए चुनाव में सपा की आरती देवी ने जीत हासिल कर जिले की सातवीं और तीसरी महिला अध्यक्ष होने का गौरव हासिल किया है।
सबसे कम उम्र की अध्यक्ष बनने का बनाया रिकार्ड
पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतकर आरती देवी ने सबसे कम उम्र की जिला पंचायत अध्यक्ष बनने का रिकार्ड बनाया है।
उन्होंने यह गौरव मात्र 23 साल सात माह की आयु में हासिल किया है जबकि इससे पूर्व यह रिकार्ड निर्वतमान जिला पंचायत अध्यक्ष रूकैया आरिफ के नाम था जो 27 साल की उम्र में जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं।
जिले की सातवीं जिला पंचायत अध्यक्ष बनी आरती देवी ने प्राइमरी शिक्षा शहर के ही प्राथमिक विद्यालय से हासिल की थी और वर्तमान में वह अंग्रेजी से एमए हैं। पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने के बाद पूरनपुर विधायक पीतमराम ने अपने पुत्र डॉ. महेंद्र के साथ आनन फानन में विवाह कराया था।
शादी के चंद दिनों बाद ही चुनाव जीत कर उन्होंने न सिर्फ अपने विधायक ससुर की इच्छाओं को पूरा कर उनका कद वहीं स्वयं भी जिले की प्रथम नागरिक बनने का गौरव हासिल किया।
जिले के विकास में आएगी और तेजी
जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद प्रेस को अपनी प्रथम प्रतिक्रिया देते हुए आरती ने कहा जनता और जनप्रतिनिधियों ने जिस उम्मीद के साथ मुझे चुना है उस पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी। जिले में चल रहे विकास कार्यों में और तेजी लाई जाएगी।
उन्होंने साथ में मौजूद निर्वतमान जिला पंचायत अध्यक्ष रूकैइया की ओर मुखातिब होते हुए कि इनका भी सहयोग और रायमशविरा लेकर विकास को गति दी जाएगी।