पीलीभीत। एक दिन पहले नगरिया कट में शिकार के लिए लगे जाल में फंसने के बाद बेहोश कर पकड़े गए नर तेंदुए की उपचार के दौरान मौत हो गई। अफसरों का दावा है कि तेंदुए के शरीर पर कोई चोट नहीं पाई गई। अचानक हुई मौत के बाद से हड़कंप मचा है। तेंदुुए की मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमॉर्टम के लिए आईवीआरआई भेजा गया है। तेंदुए की मौत से शिकारियों की सक्रियता पर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बराही रेंज से बुझिया के जंगल से निकलकर बृहस्पतिवार सुबह एक तेंदुआ नगरिया कट क्षेत्र के खेतों में पहुंच गया। इस दौरान तेंदुआ खेतों में लगे जाल में फंस गया था। चर्चा है कि यह फंदे वाला जाल शिकारियों की ओर से लगाया गया था।
अफसरों का दावा है कि चार साल के नर तेंदुए के शरीर के सभी अंग सुरक्षित थे और कोई जख्म भी नहीं पाया गया था। इस बीच शुक्रवार को आधी रात के बाद तेंदुए की मौत हो गई। फील्ड डायरेक्टर रमेश चंद्रा ने बताया कि तेंदुए के शव का आईवीआरआई में पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। अनुमति मिलते ही शव वहां भेज दिया गया है। मामले की विभागीय जांच कराई जा रही है।
फंदे से निकलने के लिए घंटों लगाई ताकत से बेदम हुआ तेंदुआ
विभागीय सूत्रों की मानें तो जिस जाल में तेंदुआ फंसा था वह तार से बना फंदा था। माना जा रहा है कि बृहस्पतिवार आधी रात के बाद तेंदुआ उसमें फंस गया। निकलने के प्रयास में फंदा कसता गया। घंटों तेंदुए ने उससे निकलने के लिए जद्दोजहद की, इससे वह बेदम हो गया। अब अफसर स्थिति को साफ करने के लिए पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं इस मामले में अज्ञात के खिलाफ विभागीय केस भी दर्ज किया जा रहा है।
सुअर के शिकार के लिए लगाते हैं फंदा
पीटीआर के सटे इलाके में शिकारी जंगली सुअर का शिकार करने के लिए फंदे का प्रयोग करते हैं। खूंटे के सहारे तार का फंदा बनाकर बांध देते हैं। वन्यजीव के फंसते ही वह उसके शरीर को जकड़ लेता है। पूर्व वर्षों में जंगली सुअर के शिकार से जुड़े मामले भी सामने आते रहे हैं। नगरिया कट क्षेत्र में भी सुअर को पकड़ने के लिए फंदा लगाने की बात सामने आ रही है।
शिकार से जुड़ चुके हैं कई लोगों के नाम
बराही रेंज का जंगल नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी से लगा हुआ है। पूर्व में शिकार से जुड़ी घटनाएं भी सामने आती रहीं हैं। इसके साथ ही डैम की तलहटी के कई लोग शिकार के मामले में नामजद किए जाते रहे हैं। अब विभाग पूरे मामले की जांच कराने की बात कह रहा है।
चार घंटे की मशक्कत के बाद पकड़ा था तेंदुआ
बृहस्पतिवार को ग्रामीणों की सूचना के बाद वन विभाग के अफसर ट्रेंकुलाइज एक्सपर्ट के साथ मौके पर पहुंचे। तेंदुए को जाल से निकालने के प्रयास किए, सफलता न मिलती देख अफसरों ने बेहोश करने की अनुमति मांगी थी। करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद दोपहर दो बजे तेंदुए को बेहोश कर पकड़ा गया था। विभागीय टीम तेंदुए को पिंजरे में कैद कर रेस्क्यू वाहन से पीटीआर मुख्यालय लाई थी। जहां विभागीय चिकित्सक डॉ. दक्ष गंगवार की निगरानी में तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा था।