पूरनपुर (पीलीभीत)। गन्ने की सिंचाई कर रहे सेहरामऊ उत्तरी के गांव चतीपुर निवासी किसान रामप्रसाद उर्फ प्रसादी (45) पर बाघ ने हमला कर दबोच लिया। कुछ दूरी पर मौजूद भतीजे के शोर मचाने पर बाघ पीछे हट गया। दोबारा हमला कर बाघ ने रामप्रसाद को मार डाला। आसपास खेत में काम कर रहे लोगों ने शोर मचाया तो बाघ वहां से नहर की ओर चला गया।
घटना रविवार शाम करीब 4:30 बजे गांव चतीपुर और मैलानी जंगल के बीच की है। गांव चतीपुर से करीब आधा किलोमीटर खेत में राम प्रसाद नहर के पानी गन्ने की सिंचाई कर रहा था। कुछ दूरी पर उनका भतीजा रामनिवास भी खेत में काम कर रहा था। इसी समय नहर की ओर से आए बाघ ने रामप्रसाद पर हमला कर दिया।
रामप्रसाद की चीख पर रामनिवास हाथ में डंडा लेकर शोर मचाता हुआ बाघ की ओर बढ़ा। तब बाघ राम प्रसाद को छोड़कर नहर की ओर जाने लगा। मगर, कुछ दूर चलने के बाद बाघ ने फिर पलटकर रामप्रसाद को दबोच लिया और नहर की ओर ले जाने लगा। खेतों में काम कर रहे कई लोग शोर-शराबा करते हुए पहुंचे। तब बाघ रामप्रसाद को छोड़कर नहर की ओर चला गया। तब तक किसान की मौत हो चुकी थी।
घटना की जानकारी पर गांव के लोगों की भीड़ जमा हो गई। हरीपुर रेंजर सहीर अहमद ने बताया कि घटना उनके क्षेत्र की नहीं मैलानी जंगल से कुछ दूरी पर खुटार सामाजिक वानिकी क्षेत्र की है। किसान की मौत से परिजन में कोहराम मचा है। किसान दो भाइयों में छोटा था। परिवार में पत्नी के अलावा चार बच्चे हैं। एक पुत्री की शादी हो चुकी है। घटना की सूचना पर सेहरामऊ उत्तरी थाना के इंस्पेक्टर संजय सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे। खुटार रेंजर मनोज कुमार ने बताया कि वे इलाहाबाद में है। घटना की जानकारी पर टीम को मौके पर भेजा गया है।
नहर में अक्सर पानी पीने आता है बाघ
खुटार रेंजर मनोज कुमार ने बताया कि घटनास्थल और जंगल से कुछ दूरी पर नहर है। जंगल से निकलकर बाघ अक्सर नहर में पानी पीने आता है। इसकी जानकारी आसपास के किसानों को भी है। इसको लेकर लोगों को जागरूक भी किया गया था।
ग्रामीणों के हंगामे के चलते चार घंटे तक नहीं पहुंचे वन अफसर और कर्मचारी
- सादा वर्दी में कर्मचारी दूरी बनाकर लेते रहे स्थिति की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। बाघ के हमले में किसान की मौत की सूचना पर जुटे ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि बाघ महीनों से गांव के आसपास चहलकदमी कर रहा है। इसकी सूचना वन विभाग के अफसरों को दी जाती रही। मगर, वन विभाग के अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों के आक्रोश और हंगामे की वजह से चार घंटे बाद तक वन विभाग के अफसर और कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे। क्षेत्र में घूम रहे वन कर्मी ने अपनी वर्दी उतारकर दूसरे कपड़े पहनकर दूर से हंगामा आदि की जानकारी करते रहे।
घटना के बाद आसपास के कई गांव के लोगों ने एकत्र होकर हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामा कर रहे लोग मौके पर वन विभाग के अफसरों को बुलाने की जिद कर रहे थे। उनका कहना था कि बाघ महीनों से सुल्तानपुर, नजीरगंज, चतीपुर, पिपरा, पटिहन आदि गांवों में चहलकदमी कर रहा है।
22 अप्रैल को गांव सुल्तानपुर निवासी सोनू पर हमला कर दिया था। कई पालतू और छुट्टा पशुओं को निवाला बना चुका है। गोआश्रय स्थल में घुसकर बाघ ने सांड़ पर हमला कर मार डाला था। कई बार विभागीय अफसरों को इसकी जानकारी दी गई। मगर बाघ को जंगल के अंदर रोकने का कोई इंतजाम नहीं किया गया।
वनकर्मी सूचना के बाद भी कभी कभार ही आते हैं। वह गांव के लोगों को सतर्क रहने की जानकारी देकर चले जाते थे। घटनास्थल पर पहुंचे सेहरामऊ उत्तरी इंस्पेक्टर संजय सिंह ने हंगामा कर रहे लोगों को शांत कराने का कई बार प्रयास किया। मगर समाचार लिखे जाने तक हंगामा कर रहे लोग वन विभाग के अफसरों, कर्मचारियों को मौके पर बुलाने की जिद पर अड़े थे।
वन विभाग की लापरवाही से गई किसान रामप्रसाद की जान
- चार दिन पहले हुई घटना को गंभीरता से लिया जाता तो बच जाती जान
संवाद न्यूज एजेंसी
पूरनपुर। चार दिन पहले भी बाघ ने घटनास्थल से करीब साढ़े तीन किलोमीटर दूर गन्ने की सिंचाई कर रहे किसान को मार डाला था। अगर उस घटना को गंभीरता से लिया जाता तो शायद रामप्रसाद की जान बच सकती थी। परिजनों को शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे विधायक ने वन मंत्री से भी मोबाइल पर वार्ता कर बाघ को पकड़वाने की मांग की थी।
रविवार को गांव चतीपुर में जिस स्थान पर घटना हुई उससे करीब साढ़े तीन किलोमीटर दूर बाघ ने मंगलवार रात बाघ ने गन्ने की सिंचाई कर रहे गांव नजीरगंज निवासी किसान हंसराज को मार डाला था। लोगों ने हंगामा कर वन विभाग के अफसरों, कर्मचारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंचे विधायक बाबूराम पासवान ने वन मंत्री से मोबाइल पर बात कर घटना की जानकारी दी और बाघ को पकड़वाने की मांग की थी। मगर शुरू से ही वन विभाग के अफसर घटना जंगल की या खेत की होने का तर्क देकर जांच के बाद कार्रवाई का तर्क दे रहे थे। संवाद