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कीर्तिमान बनाने वाली चीनी मिल ठप

Wed, 03 Oct 2012 12:00 PM IST
Pilibhit
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पीलीभीत। कभी क्षेत्र के विकास की बुनियाद रही कोऑपरेटिव की मझोला चीनी मिल अब कबाड़ में तब्दील हो रही है। किसानों के घरों को खुशियों से रोशन करने वाली इस चीनी मिल की ऐसी दुर्दशा लोग सह नहीं पा रहे हैं, हालांकि चीनी मिल प्लांट के नवीनीकरण के लिए गन्ना किसानों ने पेमेंट में चार करोड़ कटवाना तक कबूल कर लिया, जो मिल के पास है। इसके बावजूद इस मिल को दोबारा शुरू होने का उनका सपना अभी पूरा नहीं हो सका है। इस बार पूर्व ब्लाक प्रमुख श्रवण दत्त सिंह और किसान डॉ डोरी लाल वर्मा आगे आए हैं। उन्होंने शासन से मिल चालू कराने की मांग की, जिस पर सर्वे शुरू किया गया है।
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चीनी मिल स्थापित होने के पहले मझोला कस्बे का अपना कोई वजूद नहीं था। वर्ष 1965 में किसानों के शेयर और सरकारी सहायता से शुरू की गई इस चीनी मिल ने क्षेत्र के लोगों की किस्मत ही पलट दी।
प्रदेश की तत्कालीन प्रथम महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी ने चीनी मिल का उद्घाटन किया था। इसके बाद यह चीनी मिल उत्पादन के क्षेत्र में अपने कीर्तिमान स्थापित करती रही, जिससे क्षेत्र के विकास का आयाम मिला। इधर, करीब पांच साल से प्लांट में कमियां आने के बाद इसका उत्पादन पर फर्क पड़ा, जिसने मिल के वजूद कम कर दिया। हालत यह रहे कि वर्ष 2008-09 में यह चीनी मिल 37 दिन और वर्ष 2009-10 में महज सात दिन ही चल सकी। वर्ष 2010-11 में मिल ठप रही। जिससे क्षेत्र के हजारों किसानों को गन्ना की बिक्री करने में खासी परेशानी हो रही है।
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अबकी इस तरह शासन में पहुंचा मामला
पूर्व ब्लाक प्रमुख और किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष श्रवण दत्त सिंह के नेतृत्व में किसान डॉ डोरी लाल वर्मा, अनोखे लाल, सुंदरलाल शर्मा और टोडरपुर सहराई के ग्राम प्रधान जितेंद्र सिंह गिल ने सितंबर महीने में चीनी मिल संघ के प्रबंधक रवि प्रकाश अरोड़ा और प्रमुख सचिव चीनी उद्योग राहुल भटनागर से मिलकर चीनी मिल को चालू करने की मांग उठाई। इस पर दोनों अधिकारियों ने सर्वे कराने के निर्देश भी दिए। इस दौरान जिला गन्ना अधिकारी अशर्फीलाल भी उनके साथ रहे।
पहले भी बुलंद हो चुकी है आवाज
किसान नेता वीएम सिंह और सांसद वरुण गांधी भी किसानों के साथ आकर मझोला चीनी मिल चालू करने के प्रयास किए। मामला कोर्ट में भी पहुंचा और कोर्ट ने इस चीनी मिल से उत्तराखंड के 111 गांवों और उत्तर प्रदेश के 55 गांवों के किसानों का हित देखते हुए इसे मल्टी स्टेट कोआपरेटिव से जोड़ने के निर्देश दिए थे, इसके बाद क्या हुआ, आज तक नहीं पता चल सका है।
भुखमरी की कगार पर पहुंचे चार सौ कर्मचारी
कोऑपरेटिव सेक्टर की मझोला चीनी मिल को चलाने के लिए कभी दिनरात मेहनत करने वाले चार सौ कर्मचारी आज हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। सेवामुक्त होते समय गेच्युटी व पीएफ आदि का धन भी अभी तक उन्हें नहीं मिला है।
क्या कहते हैं किसान नेता
किसानों के दिल को पहुंची ठेस
मझोला मिल बंद होने के साथ ही किसानों के सामने तमाम दिक्कतें खड़ी हो गईं हैं। इससे क्षेत्र का विकास भी रुका और तमाम लोग बेरोजगार हो गए।
श्रवण दत्त सिंह, पूर्व प्रमुख-ब्लाक अमरिया।
भावनात्मक जुड़ाव है मिल से
मिल से उनका भावनात्मक जुड़ाव है। मिल ने ही क्षेत्र को पहचान दी, उसके लोगों को ठेस पहुंची है। मिल बंद होने से छोटे काश्तकार के सामने तमाम समस्याएं खड़ी हो गईं, जिससे गन्ना बुआई का रकबा कम कहो गया।
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डॉ डोरीलाल वर्मा, किसान।
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