पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 8.62 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। इससे कई बचाव कार्य कराए जाएंगे।
पांच वन रेंजों में बंटे जिले के जंगलों में बाघ समेत वन्यजीवों के बेहतर संरक्षण और मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसके लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इंसानों और वन्यजीवों, खासकर बाघों के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए व्यापक योजना बनाई है। फील्ड डायरेक्टर एवं मुख्य वन संरक्षक के माध्यम से यह प्रस्ताव प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को भेजा गया है। योजना के तहत संवेदनशील इलाकों में 15 किलोमीटर लंबी चेनलिंक फेंसिंग कराई जाएगी। इसपर 5.13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
अधिकारियों का मानना है कि इससे बाघों के आबादी क्षेत्र की ओर आने की घटनाओं में कमी आएगी। इससे पहले सोलर फेंसिंग की व्यवस्था की गई थी, लेकिन अपेक्षित परिणाम न मिलने पर अब चेनलिंक फेंसिंग पर जोर दिया जा रहा है। वर्ष 2020 से अब तक करीब 66.92 किमी क्षेत्र में 19.65 करोड़ रुपये की लागत से फेंसिंग कराई जा चुकी है।
3.49 करोड़ रुपये से अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे
इसके अलावा पूरनपुर रेंज के गोपालपुर में बन रहे रेस्क्यू सेंटर के लिए 3.49 करोड़ रुपये से अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे। इनमें थर्मल ड्रोन, नाइट विजन दूरबीन, रेंज फाइंडर, बोलेरो कैंपर, ट्रैक्युलाइज गन और विशेष ट्रक शामिल हैं। वन्यजीवों के इलाज के लिए पोर्टेबल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम भी उपलब्ध कराए जाएंगे। डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि यह प्रस्ताव राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि के तहत तैयार किया गया है, इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी लाने में मदद मिलेगी। संवाद