माधोटांडा। गोमती नदी के प्रवाह को बेहतर बनाने और जल स्रोतों की स्थिति का आकलन करने के लिए दिल्ली और लखनऊ से आईं दो सदस्यीय टीम ने क्षेत्र में व्यापक सर्वेक्षण किया। चार दिनों से जारी यह सर्वे अब अंतिम चरण में पहुंच गया है।
माधोटांडा कस्बे में गोमती नदी का उद्गम स्थल है। अविरल धारा न बहने से गोमती नदी उद्गम स्थल के बाद अपना अस्तित्व खोती जा रही है। कई स्थानों पर अतिक्रमण हावी होने से नदी ने नाले का रूप भी ले रखा है। इधर केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से नदी की अविरल धारा के प्रवाह को लेकर प्रयास शुरू किए। इसके बाद नदी के अविरल प्रवाह और संभावित वैकल्पिक मार्गों के अध्ययन के लिए गठित दो सदस्यीय सर्वे टीम ने माधोटांडा क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण स्थलों का निरीक्षण किया। वैफकोस के टीम के डिप्टी चीफ इंजीनियर और सर्वेयर लखवीर सिंह के अलावा एक अन्य सदस्य भी शामिल हैं। टीम ने नदी के स्रोत, वर्तमान जल प्रवाह और संभावित सुधार उपायों का जायजा लिया। सर्वे के दौरान टीम ने माधोटांडा रजवहा से लेकर उस नाले तक का निरीक्षण किया, जिसे वर्षों पहले भूमि संरक्षण विभाग द्वारा खोदकर गोमती के प्रवाह क्षेत्र से मिलाया गया था। इसके साथ ही शारदा सागर खंड की ओर से सपा सरकार के कार्यकाल में करीब दो करोड़ रुपये की लागत से कराए गए सर्वे और खोदाई वाले क्षेत्रों का भी अध्ययन किया गया, जहां झीलों के स्रोत खोलकर पानी का प्रवाह सुचारू किया गया था।
इसके अलावा टीम ने देवीपुर मीनार क्षेत्र का भी निरीक्षण किया, जहां वर्तमान में पानी की आपूर्ति की जा रही है। इन तीनों प्रमुख स्थलों पर जल की उपलब्धता, प्रवाह की स्थिति और संभावित सुधार की संभावनाओं का आकलन किया गया। सर्वे टीम के सदस्यों ने बताया कि उनका निर्धारित कार्य लगभग पूरा हो चुका है और आगे भी आवश्यकतानुसार सर्वे की कार्रवाई जारी रखी जाएगी। इस सर्वे के आधार पर भविष्य में गोमती नदी के प्रवाह को बेहतर बनाने के लिए ठोस योजना तैयार किए जाने की संभावना जताई जा रही है।