जेठ की धूप में गन्ने के साथ सूख रहा किसान
कहीं वाहनों की कतार तो कहीं पर्चियां की समस्या
गन्ना समस्या हल न होने किसानों में बढ़ रहा आक्रोश
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
प्रधानमंत्री किसानों की आय दोगुना करने की घोषणा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों को उसकी फसल का वाजिब दाम मिलना तो दूर बेचने के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बार किसानों के लिए गन्ना उगाना जी का जंजाल बनता जा रहा है। पेराई सत्र समाप्ति की ओर है, लेकिन किसानों का गन्ना अब तक या तो खेत में खड़ा है या ट्रॉलियों पर मिल गेट पर सूख रहा है। बेहाल किसानों की समस्याओं का निस्तारण करने के बजाए अधिकारी टालमटोल में लगे हुए हैं। इससे किसान के सब्र का बांध टूट रहा है और आक्रोशित होकर हंगामा कर रहे हैं।
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सट्टा बंद करने पर किसानों का हंगामा
कर्मचारियों से अभद्रता, सचिव से भी नोंकझोंक
पीलीभीत। मिलों का पेराई सत्र समाप्ति की ओर है लेकिन किसानों को पर्ची नहीं मिल रही है। कई किसानों के सट्टे भी बंद कर दिए गए। इसको लेकर किसान भड़क गए और उन्होंने समिति पर हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान एक सीजनल कर्मचारी के साथ अभद्रता भी गई साथ ही सचिव से भी नोकझोंक हुई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामला शांत कराया।
पीलीभीत सहकारी समिति इस सीजन में प्रारंभ से ही विवादों में रही है। एजीएम में हंगामा हुआ था इसके बाद सचिव और किसानों के बीच करीब एक माह पूर्व भी नोकझोंक हुई थी। अब पेराई सत्र की समाप्ति के समय भी किसानों को पर्चियां न मिलने से आक्रोश बढ़ रहा है। इसको लेकर बुधवार को गन्ना समिति पहुंचने किसानों ने सचिव के न मिलने पर गन्ना परिषद के चेयरमैन रचित अग्रवाल को फोन पर समस्या बताई। इस पर चेयरमैन समिति पहुंचे लेकिन उन्हें सचिव नहीं मिले। कुछ देर बाद पहुंचे सचिव को देख किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया। किसानों का आरोप है कि गन्ना दलालों से रकम लेकर उनकी पर्चियां जारी की जा रही हैं जबकि आम किसान को बार-बार लिखित देने के बाद भी पर्चियां नहीं दी जा रही हैं। इस हंगामे के दौरान सचिव कार्यालय में बैठे एक सीजनल बाबू ने चेयरमैन से जोर जोर से बोलना शुरू कर दिया। इसपर कुछ ने इस तरह बात करने पर पहले तो विरोध जताया और बात बढ़ने पर हाथापाई कर दी। इस बीच सूचना मिलने पर सुनगढ़ी पुलिस भी पहुंच गई। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया। इस बाबत गन्ना परिषद चेयरमैन रचित अग्रवाल का कहना है कि सचिव का व्यवहार किसानों के प्रति ठीक नहीं है। पहले भी कई बार वह किसानों से अभद्रता कर चुके हैं। कार्यालय न बैठने के चलते किसानों को भटकना पड़ता है। इसी की शिकायत पर गन्ना समिति पहुंचे थे। उधर सचिव अतिराज सिंह का कहना है कि अभी समिति क्षेत्र में लगभग 30 लाख क्विंटल गन्ना खड़ा है। सभी किसानों को पर्चियां दी जाएंगी लेकिन क्रम व सट्टा निर्धारण के अनुसार ही वितरण होगा जबकि किसान जल्द अपना गन्ना डालने के लिए पर्ची जारी करने का दबाव बनाते हैं। उन्होंने बताया कि सीजनल कर्मचारी से अभद्रता करने पर चेयरमैन के खिलाफ तहरीर भी पुलिस को दी जा रही है।
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आठ दिन से वाहनों में सूख रहा किसानों का गन्ना
मिल प्रशासन नहीं कर पा रहा तौल, किसान परेशान
पूरनपुर। चीनी मिल के क्लेरीफायर टैंक के ढहने के बाद से किसानों का गन्ना मिल गेट एवं क्रय केंद्रों पर वाहनों में लदा खड़ा है। इसकी मिल प्रबंधन तौल नहीं कर रहा है। आठ दिन से खुले में रखा गन्ना लगातार सूख रहा है।
चीनी मिल का क्लेरीफायर टैंक 25 अप्रैल की शाम अचानक ढह गया था। इससे मिल गेट के अलावा कीरतपुर, जटपुरा, कुवंरपुर ताल्लुके गजरौला, दुधिया खुर्द, रंपुरा कोन, टांडा छत्रपति क्रय केंद्रों पर तौल बंद हो गई। मिल गेट पर हंगामे के बाद कुछ किसानों का गन्ना तौलवा लिया गया लेकिन इंडेंट के अनुसार बाद में गन्ना लेकर पहुंचे किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है। इससे क्रय केेंद्र पर खड़े किसान परेशान हो रहे हैं। कीरतपुर गन्ना क्रय केंद्र पर ट्रालियों में सूख रहे गन्ना की जानकारी होने पर समिति उपाध्यक्ष स्वदेश सिंह यादव ने इसकी शिकायत सीसीओ एवं समिति सचिव से की। उधर, किसानों से तौलकर चीनी मिल में डंप किया गया गन्ना बुधवार को बीसलपुर चीनी मिल भेज दिया गया। इसके बाद भी अभी मिल गेट पर गन्ना पड़ा सूख रहा है। गन्ना कब और कैसे तौला जाएगा इसको लेकर किसान चिंतित हैं।
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एलएच ने सूखा गन्ना लेने से किया इनकार, बीसलपुर में लगा जाम
पूरनपुर। बीसलपुर चीनी मिल के बाहर गन्ना से भरे वाहनों का जाम लग गया है। इससे किसानों को गन्ना तुलवाने को कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। पूरनपुर से भेजे गए गन्ना से भरे ट्रॉले भी घंटों बाद लौट पा रहे है। पीलीभीत की एलएच चीनी मिल ने आठ दिनों से सूख रहे गन्ना को लेने से इनकार कर दिया है।
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एलएच ने बंद किए छह गन्ना क्रय केंद्र
पूरनपुर। क्षेत्र का गन्ना खरीदने वाली पीलीभीत की एलएच चीनी मिल ने आपूर्ति योग्य गन्ना न होने का हवाला देकर क्षेत्र के गन्ना क्रय केंद्र सुल्तानपुर, मैनाकोट, कुर्रैया, रंपुरा फकीरे ए और बी, जरा के गन्ना क्रय केंद्र पर गन्ना की खरीद बंद कर दी। मिल प्रशासन ने सहकारी गन्ना समिति सचिव को इसकी सूचना भेजकर जानकारी दी है।
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चीनी मिल गेट के गन्ने को बीसलपुर भिजवा दिया गया। बाकी गन्ना भी बृहस्पतिवार को भेजा जाएगा। क्रय केंद्रों पर खड़े किसानों को भी टोकन जारी किया जा रहा है।
एसके अग्रवाल, जीएम
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चीनी मिल के सामने लगा गन्ने का अंबार, आवागमन प्रभावित
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बीसलपुर। चीनी मिल में दो क्षेत्रों का गन्ना आने के कारण मिल गेट पर गन्ने का अंबार लगा हुआ है। मिल के सामने से गुजर रहे शाहजहांपुर रोड के काफी हिस्से पर गन्ना भरे वाहन खड़े होने के कारण उधर का आवागमन प्रभावित हो रहा है। मालूम हो कि किसान सहकारी चीनी मिल में पिछले एक सप्ताह से बीसलपुर के अलावा पूरनपुर क्षेत्र का भी गन्ना आ रहा है। इस वजह से मिल गेट पर गन्ने का अंबार लगा हुआ है। मिल के सामने से गुजर रहे शाहजहांपुर रोड के काफी हिस्से पर गन्ना भरे वाहन खड़े होने के कारण उधर का आवागमन प्रभावित हो रहा है। उधर से गुजरने वाले लोगों को काफी दिक्कत हो रही है ।
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किसानों ने नहीं उखड़ने दिया गन्ना क्रय केंद्र
बीसलपुर/करेली। गांव सिधौंरा खरगपुर के किसानों ने बुधवार को उखड़ रहे अपने गांव के गन्ना क्रय केंद्र को विरोध कर रुकवा दिया है। बजाज हिंदुस्तान चीनी मिल मकसूदापुर कर्मचारी बुधवार को दोपहर तीन बजे गांव सिधौरा खरगपुर के गन्ना क्रय केंद्र को उखाड़ने आए थे। कर्मचारियों ने क्रय केंद्र का उखाड़ना शुरू भी कर दिंया था। इसी बीच जानकारी होने पर मौके पर काफी किसान जमा हो गए। किसानों ने यह कहकर क्रय केंद्र उखाड़े जाने का विरोध करना शुरू कर दिया कि जब तक पूरे क्षेत्र का सारा गन्ना तुल नहीं जाएगा, तब तक क्रय केंद्र नहीं उखड़ने दिया जाएगा। इस बात को लेकर कर्मचारियों और किसानों में काफी नोंक झोंक भी हुई। इसी बीच कुछ किसानों ने सहकारी गन्ना विकास समिति के सचिव जितेंद्र कुमार से शिकायत कर दी। सचिव ने मिल अधिकारियों को फोन पर क्रय केंद्र न उखड़वाने के निर्देश दिए। अधिकारियों का फोन आते ही मिल कर्मचारियों ने क्रय केंद्र उखाड़ने का इरादा बदल दिया और वापस चले गए। इस मुद्दे को लेकर क्रय केंद्र पर लगभग दो घंटे हंगामा चलता रहा। विरोध और हंगामा करने वालों में श्रवण शुक्ला, राहुल शुक्ला, भगवान स्वरूप, मुरारीलाल तिवारी, रामलखन, रितिक कुमार, अनिल कुमार, रामआसरे, अनुराग अवस्थी, नन्हेंलाल, वासुदेव सिंह, राममोहन, महल सिंह और दफेदार समेत बहुत किसान शामिल थे।