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सिमरिया गांव में 15 दिन के भीतर छह सौ पशुओं की हो चुकी मौत

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पूरनपुर के गांव जनकापुर में जांच करने पहुंचे डिप्टी सीवीओ। संवाद - फोटो : PILIBHIT
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पूरनपुर। सिर्फ सिमरिया गांव में तकरीबन दो करोड़ रुपये कीमत के 600 पशुओं की 15 दिन के भीतर मौत हो गई। आसपास के कई गांवों में हुई मौतों के आंकड़े को जोड़ेंगे तो किसानों क्षति कई करोड़ रुपये हो जाएगी। घुंघचाई, चंदोखा, जितौरिया में भी बीमारी से पशुओं के मरने की खबर है।
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जानवरों के मरने का पखवाड़ा भर से शुरू हुआ सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। गांव सिमरिया ताल्लुके अजीतपुर बिल्हा में पखवाड़ा भर में पशुपालकों के करीब छह सौ पशुओं की मौत हो चुकी है। गांव निवासी बुद्धसेन के दो दुधारू भैंस सहित छह पशुओं की एक के बाद एक की मौत हो गई। रामस्वरूप के ढाई लाख रुपये कीमत के पांच पशुओं की मौत हुई है। रामसेवक की 50 हजार रुपये कीमत की भैंस, 20 हजार रुपये कीमत की गाय चार दिन में मर गई। राकेश की पत्नी मीना ने बताया कि 60 हजार रुपये कीमत की भैंस, सात हजार रुपये कीमत की पड़िया की तीन दिन में मौत हुई है। धनीराम की पुत्रवधू नीलम ने बताया कि करीब एक लाख रुपये कीमत की उसकी 13 बकरियां 10 दिन के अंदर मर गईं। मीना देवी ने बताया कि उसके पुत्र बहादुर और सतीश की एक-एक भैंस तीन दिन में मरी है। राम सिंह की पत्नी जमुना देवी ने बताया कि 40 हजार रुपये कीमत की भैंस बीमार होने पर उसे छह इंजेक्शन भी लगवाए। मगर भैंस नहीं बची। राजेंद्र के भतीजे रामसेवक ने बताया कि उसके चाचा की परसों 30 हजार रुपये कीमत की भैंस और छह दिन पहले 10 हजार रुपये कीमत की पड़िया मर गई। इसके अलावा गांव निवासी राजेंद्र, शिवकुमार, शिवशंकर, सोनपाल, बृजपाल, गिरधारी लाल, मीना देवी, कौशल कुमार, रामचरन का एक-एक पशु जबकि झम्मन लाल की एक भैंस, पांच बकरी, वीरेंद्र यादव की तीन गाय सहित कई पशु पालकों के पशुओं की बीमारी से मौत हुई है। गांव के अलावा आसपास गांवों में फैली बीमारी से पशुओं की मौत की सूचना पर पशु चिकित्साधिकारी/डिप्टी सीवीओ डॉ. राजीव मिश्र ने सोमवार को टीम के साथ कई गांवों में का दौरा किया।
पहले बाढ़ ने मारा अब पशुओं की मौत से आंसू आए
किसानों को पहले बाढ़ ने मारा फिर धान को औने-पौने दामों में बेचना पड़ा। अब पशुओं की मौत हो रही है। अकेले गांव सिमरिया ताल्लुके अजीतपुर बिल्हा में पखवाड़ा भर के अंदर करीब दो करोड़ रुपये कीमत के छह सौ पशुओं की मौत हो चुकी है। पशुओं की मौत का सिलसिला न थमने से किसानों की आंखों में आंसू हैं।
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पशु पालक के बुलाने पर तो गांव के पशुओं को टीका लगाया गया। मगर अभियान चलाकर पशुओं का टीकाकरण कभी नहीं हुआ। पशुओं के बीमार होने की जानकारी पर अब पशु चिकित्सक पहुंचते तो हैं। पशुओं का इलाज भी करते हैं पर पशु बच नहीं रहे हैं। गांव वाले जब तक एक पशु को दफना कर लौटते है। तक तक पहले दूसरे पशु की मौत हो जाती है। गांव के करीब छह सौ पशुओं की मौत हो चुकी है।
- रामऔतार भारती, प्रधान पति
ढाई लाख रुपये कीमत के पांच पशुओं की मौत हो चुकी है। अचानक पशु चारा खाना छोड़ते हैं। उनके खुर भी पक जाते हैं। चारा खाना छोड़ने के कुछ घंटों बाद ही पशु की मौत हो रही है। गांव में पशुओं का टीकाकरण नहीं हुआ।
- रामस्वरूप
भाई रामसेवक की पचास हजार रुपये कीमत की भैंस और बीस हजार रुपये की गाय मर गई। दोनों जानवरों को बुखार आया और चारा खाना छोड़ दिया था। खुर भी पकने लगे थे। जब तक इलाज शुरू कराया जाता। दोनों पशु मर गए।
- जगन्नाथ
55-55 हजार रुपये कीमत की तीन भैंस बीमारी से मर गई। पशुओं के बीमार होने की जानकारी पर दवाई भी कराई। टीका भी लगवाया। मगर तीनों पशु मर गए। - रामविलास
बीमार पशुओं का सीरम सैंपल और लार का सैंपल लेकर आरवीआरआई को भेजा गया है। सप्ताह भर में वैक्सीन मिलने की उम्मीद है। खुरपका, मुंहपका का टीका इस समय नहीं है। गला गोंटू का टीका बीमार जानवरों को लगवाया जा रहा है। मगर इससे भी पशु नहीं बच रहे है। एक गांव में बीमारी थमने पर दूसरे गांव में पैर पसार रही है। सिमरिया गांव में 4500 से अधिक पशु थे। मेरे अनुमान के हिसाब से सौ से अधिक पशु मरे होंगे। जिन पशुपालकों के पशु मरे है। उनकी सूची तैयार कराई जा रही है।
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- डॉ. राजीव मिश्र, पशु चिकित्साअधिकारी
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