पीलीभीत। जीएम के संभावित दौरे को लेकर जहां रेलवे जंक्शन को चमकाने की कोशिशें की जा रही हैं, वहीं जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर दो पर अव्यवस्थाओं की भरमार है। प्लेटफार्म से ट्रेनें तो संचालित हो रही हैं, लेकिन यात्री सुविधाओं का अब भी टोटा है। यात्रियों के लिए बैठने के लिए न तो बेंच हैं और न ही पेयजल की व्यवस्था। ट्रेन पकड़ने के लिए अगर यात्री जल्दबाजी करें तो प्लेटफार्म पर बिछीं ऊबड़खाबड़ ईटों से गिरकर उनके चोटिल होने की आशंका बनी रहती है। तराई जनपद के मुख्यालय पर स्थित रेलवे जंक्शन को वर्ष 2008 में आदर्श रेलवे जंक्शन का खिताब मिल चुका है। इधर, कुछ दिनों में जीएम का दौरा भी होने वाला है। दौरे को लेकर जिम्मेदार जंक्शन को चमकाने में जुटे हैं, लेकिन उनका पूरा ध्यान प्लेटफार्म संख्या एक और जंक्शन के बाहरी हिस्से पर ही है। वर्तमान में प्लेटफार्म नंबर दो पर सिर्फ दिक्कतें ही दिक्कतें हैं। यहां एक भी सुविधा नजर नहीं आती है। ब्रॉडगेज का कार्य पूर्ण होते ही प्लेटफार्म से ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया गया। प्लेटफार्म दो से टनकपुर और बरेली की ट्रेनों का संचालन जारी है। इस रूट पर जाने वाले यात्रियों की संख्या रोजाना करीब दस हजार के आसपास है, लेकिन यात्रियों के बैठने के लिए प्लेटफार्म पर एक भी बेंच नहीं है। पेयजल के लिए भी यात्रियों को भटकना पड़ता है। प्लेटफार्म पर टंकी का फाउंडेशन तो तैयार है, लेकिन पानी की सप्लाई शुरू नहीं की जा सकी है। इसके अलावा निर्माण कार्य चल रहे होने से प्लेटफार्म पर जहां-तहां निर्माण सामग्री फैली रहती है। ऐसे में यदि ट्रेन पकड़ने के लिए यात्री जल्दबाजी करते हैं, तो वह खतरे से खाली नहीं है।
हादसे का सबब न बन जाएं प्लेटफार्म पर बेतरतीब पड़े तार
प्लेटफार्म नंबर दो पर रात में प्रकाश की व्यवस्था करने के लिए बिजली के तारों को बेतरतीब ढंग से जमीन पर छोड़ दिया गया है। ऐसे में यदाकदा तार यात्रियों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। खास बात यह है कि प्लेटफार्म पर की गई प्रकाश की व्यवस्था मात्र विद्युत आपूर्ति तक सीमित है। अगर बिजली नहीं है, तो प्लेटफार्म अंधेरे में ही डूबा रहता है। जनरेटर की व्यवस्था तक नहीं है।
वर्जन
यात्रियों को किसी तरह की दिक्कत न हो इसका खासा ध्यान रखा जा रहा है। प्लेटफार्म नंबर दो पर निर्माण कार्य के चलते जो अव्यवस्थाएं हैं उन्हें भी दुरुस्त कराया जा रहा है। - धर्मेंद्र कुमार, स्टेशन अधीक्षक