08पीबीटीपी- 1 से 7 तक
हेडिंग -- कभी भी जान की आफत बन सकते हैं जर्जर बिजली पोल
अथवा
अफसरों की लापरवाही से मंडरा रही जान पर आफत
- शहर में लगे बिजली के जर्जर पोल बने खतरे की घंटी, लोग परेशान
- पिछले दिनों बरेली में जर्जर पोल गिरने से हो चुकी है युवती की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
पिछले दिनों लोहे का जर्जर पोल गिरने से बरेली जनपद में सड़क किनारे खड़ी एक युवती की मौत हो गई थी। ठीक उसी तरह यहां भी शहर में हर कदम पर बिजली के पोल गिरने का खतरा मंडरा है। हादसे को दावत देने वाले बिजली के जर्जर पोलों की स्थिति चौंकाने वाली हैं। अंजान बने बिजली विभाग के अफसरों को कौन समझाए कि वाहन की हल्की टक्कर लगने पर यह जंग लगे जर्जर पोल हिलने लगते है। जो कभी भी राहगीरों के सिर पर मौत बनकर गिर सकते है। विभागीय कर्मी बताते है कि पोलों के जमीन के पास गुलाई में आधा हिस्सा जंग से गायब होने के कारण यह पोल सिर्फ राहगीरों के जान के दुश्मन नहीं बल्कि घर के अंदर रह रहे लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। पोल का बेस गलने के कारण अर्थिंग बेअसर हो जाती है, ठीक तरीके से अर्थिंग नहीं मिलने के कारण करंट लगने और बिजली के उपकरण फुंकने के चांस बढ़ जाते है।
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कांशीराम कॉलोनी के अधिकांश पोल जर्जर
ईदगाह स्थित कॉशीराम कॉलोनी में अधिकांश बिजली लोहे के पोलों की स्थिति बेहद दयनीय है। पोल का निचला हिस्सा यानी बेस पूरी तरह गल चुका है। खासबात यह है कि कॉलोनी वाले विभागीय अफसरों को कई बार अवगत करा चुके हैं लेकिन पोलों की स्थिति का मौके पर जाकर किसी ने जायजा नहीं लिया।
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आकाश गोस्वामी का कहना है कि जर्जर पोलों से भयंकर दुर्घटना की आशंका बनी है। समय रहते इन पोलों को ठीक नहीं कराया गया तो किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। शहर में जर्जर पोलों की स्थिति अफसरों से छिपी नहीं है।
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दीपक वर्मा ने बताया कि जर्जर पोलों की स्थिति बिजली विभाग के अफसरों व कर्मचारियों से नहीं छिपी है। विभागीय अफसर जर्जर पोलों को जानबूझकर नजर अंदाज कर रहे है। शिकायत के बाद भी स्थिति जस की तस है। कभी भी हादसा हो सकता है।
वर्जन-
लोहे के बेस गल चुके जर्जर पोलों की जगह पर नए पोल लगाने का कार्य विभाग द्वारा कराया जा रहा है। अनहोनी की आशंका के चलते उपभोक्ता की शिकायत को गंभीरता से लेकर समस्या का समाधान करा दिया जाता है।
- एनपी सिंह, एक्सईएन