लोकतंत्र सेनानी मामले में शासन स्तर पर भी हो जांच
पीलीभीत। एडीएम की जांच में पांच लोकतंत्र सेनानियों के फर्जी पाए जाने के बाद इस मामले में जिम्मेदारी फिक्स करने के लिए डीएम स्तर से ऊपर किसी उच्चाधिकारी के नेतृत्व में एक और बड़ी जांच किया जाना जरूरी है। हालांकि इसके लिए शासन को संस्तुति करने की हिम्मत जुटाना जिला प्रशासन के लिए आसान नहीं है।
मालूम हो कि लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2016 की धारा 8(2) में साफ उल्लेख है कि संबंधित जिले के जिलाधिकारी सम्मान राशि की स्वीकृति में हुई किसी भी अनियमितता के लिए उत्तरदायी होंगे। साथ ही धारा 8(1) में कहा गया है कि किसी आवेदक की सम्मान राशि निरस्त किए जाने की दशा में सम्मान राशि की वसूली उससे भू राजस्व बकाए के रूप में की जाएगी। अब जांच में फर्जी मिले पांच लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान राशि जिन डीएम के कार्यकाल में स्वीकृत हुई होगी, वे सभी डीएम इस अनियमितता के लिए उत्तरदायी माने जाएंगे। ऐसे में मौजूदा डीएम या एडीएम अपने से पूर्व के डीएम को जिम्मेदार ठहराने की हिम्मत कैसे जुटा सकते हैं?
जाहिर है इसके लिए डीएम स्तर से ऊपर के किसी बड़े अधिकारी से इस मामले की एक और जांच कराया जाना जरूरी है और यह काम शासन ही कर सकता है। जिला प्रशासन इसके लिए शासन से संस्तुति कर सकता है, पर इसकी संभावनाएं कम ही हैं। प्रशासनिक जांच में पांच लोकतंत्र सेनानियों के फर्जी पाए जाने के बाद अब प्रशासन का अगला कदम उन्हें अब तक दी गई सम्मान राशि की वसूली भू-राजस्व बकाए के रूप में करनी है। सम्मान राशि योजना लागू होने के दिन से लेकर पिछले वर्ष के अंत तक सरकार की ओर से एक-एक लोकतंत्र सेनानी को लगभग छह-छह लाख रुपये मिल चुके हैं। यदि प्रशासन ने अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार यह रकम वसूलने को कदम उठाया तो सरकार को लगभग 30 लाख रुपये मिल जाएगें, लेकिन प्रशासन इस तरह मूड में नहीं दिखता। उसकी मंशा वसूली की इस कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डालने की है।
इधर एडीएम ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस बिंदु पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया है कि लोकतंत्र रक्षक सेनानी संगठन की शिकायतों के बाद जिन पांच लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान राशि एलआईयू और पुलिस से जांच कराने के बाद तत्कालीन डीएम मासूम अली सरवर ने मार्च 2017 को रोक दी थी। उन्होंने फाइल में अपनी टिप्पणी अंकित किया कि आश्चर्यजनक है कि अभिलेख उपलब्ध न होने के बाद भी उन्हें लोकतंत्र सेनानी कैसे घोषित किया गया। भविष्य में जो भी लोकतंत्र सेनानी पेंशन हेतु पत्रावली प्रस्तुत की जाए उनमें इन पांच लोगों के नाम शामिल न किए जाएं। पुन: सभी लोकतंत्र सेनानियों की पत्रावलियां देख ली जाएं और संदेह होने पर तत्काल वार्ता करें, लेकिन डीएम मासूम अली सरवर के जिले से ट्रांसफर होते ही इन पांच लोगों की सम्मान राशि पिछले छह महीने के एरियर के साथ रिलीज कर दी गई। अब डीएम ने जिन पांच लोगों की सम्मान राशि निरस्त की। उनकी सम्मान राशि किन अधिकारियों व कर्मचारियों की साठगांठ से बहाल कर दी गई, यह जांच का विषय है।