नोट: खबर शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, लखीमपुर खीरी और सीतापुर दी जा सकती है।
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जर्जर शारदा सागर डैम में ही पानी भरने की तैयारी
प्रदेश सरकार से मरम्मत के नाम पर साल भर से नहीं मिली एक फूटी कौड़ी
सूखा पड़ने पर प्रदेश के दस से अधिक जिलों में होती है डैम के पानी से सिंचाई
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा (पीलीभीत)। प्रदेश में सूखा पड़ने या पहाड़ों से पानी आने पर शारदा सागर डैम से ही प्रदेश के करीब दस से अधिक जिलों में सिंचाई के लिए पानी की भरपाई की जाती है। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जर्जर होते जा रहे शारदा डैम की मरम्मत को पूरे वर्ष बजट के नाम एक धेला भी नहीं दिया गया। ऐसे में इस बार रबी फसलों की सिंचाई के लिए जर्जर शारदा डैम में ही पानी भरने की तैयारी शुरू की गई है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना के तहत 3,99,723 एकड़ में फैले शारदा डैम में पानी का भंडार पूर्व में 623 फुट तक किया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे डैम में पानी भरने की क्षमता घटती जा रही है। उसका मुख्य कारण एक तो डैम में पानी के साथ आने वाली सिल्ट है, दूसरे मुख्य बाडी की अधिकांश पिचिंग उखड़ चुकी है। डैम में पानी निकास को बनाई गई लांग और क्रास ड्रेनें भी सफाई न होने से चोक हो चुकी है। हालांकि, तत्कालीन प्रदेश सरकार से जुड़े ठेकेदारों ने काम हथिया कर मरम्मत के नाम पर मात्र खानापूरी की थी। शिकायत पर इसकी जांच भी हुई। जिसके बाद कुछ स्थानों पर मामूली कार्य दोबारा कर खानापूरी कर ली गई।
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प्रोजेक्ट मंजूर मगर सरकार से नहीं मिला बजट
सिंचाई विभाग की शारदा सागर खंड ने डैम की जर्जर हालत को ध्यान में रखते हुए मुख्य बाडी की सड़क समेत अन्य मरम्मत कार्य को लेकर प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा। इसके अलावा डैम के बाहरी हिस्से की जर्जर सीपेज ड्रेन का भी प्रोजेक्ट बनाकर भेजा गया, लेकिन मौजूदा प्रदेश सरकार ने पूरे वर्ष जर्जर डैम के सुधार को बजट के नाम पर एक धेला भी नहीं दिया। इधर, अब सिंचाई विभाग की मजबूरी है कि डैम को जर्जर हालत में ही पानी से भरा जाएगा।
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प्रदेश के कई जनपदों में होती है सिंचाई
शारदा डैम में भंडार किए पानी से जनपद समेत प्रदेश के शाहजहांपुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली तक करीब दस से अधिक जिलों में सूखा पड़ने या पहाड़ों से पानी की कमी पर सिंचाई की भरपाई होती है। अभियंता जर्जर डैम का लेकर साल भर बजट का इंतजार करते रहे, लेकिन सरकार ने बजट नहीं दिया।
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सिल्ट पटान से घटी पानी की क्षमता
डैम की ऊंचाई वैसे तो 633 फुट है, लेकिन पहले इसमें 623 फुट तक पानी भरा जाता था। अब पानी डेड लेबल डैम पटने के चलते 608 फुट हो गया है। बताते हैं कि जीरो से छह किमी तक सिल्ट अधिक हो गई है। हालांकि अब भी कुछ समय तक के लिए डैम को 622 फुट तक भरा जाता है, लेकिन इसे जल्द ही खाली कर दिया जाता है।
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...तो बड़ा भू-भाग घिर जाएगा पानी से
अभियंताओं के मुताबिक बरसात के दौरान डैम को 615 फुट के ऊपर नहीं भरा जाना चाहिए। यदि डैम में रिसाव या किसी अन्य कारण से क्षति होती है तो 127 किमी एरिया (कैचमेंट एरिया) पानी से घिर जाएगा। इससे जनपद के अलावा लखीमपुर, सीतापुर आदि भी प्रभावित होंगे।
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मॉनिटरिंग में भी होती है परेशानी
शारदा डैम को जब पानी से भरा जाता है तो पूरे डैम पर सिंचाई कर्मियों से मॉनिटरिंग कराई जाती है। लांग ड्रेन सहित मुख्य बॉडी पर लगातार पैनी निगाह रखी जाती है, लेकिन यह ड्रेनें और मुख्य बाडी झाड़ झंखाड़ से पटी हैं। ऐसे में मॉनीटरिंग करना भी बेहद मुश्किल ही है।
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वर्जन:
शारदा डैम की मरम्मत को कई परियोजनाएं मंजूरी के लिए शासन को भेजी गई थी, लेकिन किसी पर बजट नहीं मिला। अब अगले माह में डैम को पानी से भरना शुरू कर दिया जाएगा।
- धर्म घोष, सहायक अभियंता, शारदा सागर प्रथम