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कागजों पर खेल, ओडीएफ का दावा फेल

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कागजों पर खेल, ओडीएफ का दावा फेल
कई ग्राम पंचायतों में अधिकांश शौचालय अधूरे, अफसर थपथपा रहे पीठ
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। जिले को ओडीएफ घोषित करने में जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। दो अक्तूबर तक जिले को ओडीएफ करना था, जैसे-जैसे तारीख नजदीक आती गई, वैसे अफसर जिले को ओडीएफ करने के लिए तेजी दिखाते गए। आधे अधूरे शौचालयों के जरिये गांवों को ओडीएफ कराने में अफसरों ने पूरी ताकत झोंक दी। ऐसे में जिले को ओडीएफ को लेकर किए जा रहे दावा हवा में तैरते दिखाई दे रहे हैं। सच्चाई का पता कई गांवों का दौरा करने पर पता चला है।
सरकार ने पूूरे देश को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की है। जिले में कुल 721 ग्राम पंचायतों में 1,78,788 शौचालय बनने थे, अफसरों को दावा है कि महज ढाई सौ शौचालय का निर्माण होना बाकी है। जिला ओडीएफ घोषित हो जाएगा। सच्चाई यह है कि पंचायती राज विभाग द्वारा जो गांव बीते दिनों ओडीएफ किए जा चुके हैं उनमें भी अभी तक पूरे शौचालय नहीं बन पाए हैं। घंघुचाई, बिलसंडा के कई गांवों में तो शुरुआती तेजी के बाद शौचालयों का ढांचा तो खड़ा कर दिया लेकिन निर्माण अधूरा कराकर कार्य छोड़ दिया गया। घुंघचाई में अधिकांश शौचालयों के गड्ढे खुले पड़े हैं। लोगों को हर समय बच्चों को निगरानी करनी पड़ती है। यहीं हाल ओडीएफ हो चुके बरखेड़ा ब्लाक का है। खास बात यह कि पिछले माह ब्लॉक को ओडीएफ कर दिया गया था। जबकि हकीकत बिल्कुल उलट है। सवा सौ परिवार अभी भी शौचालय विहीन हैं। अन्य विकास खंड की ग्राम पंचायतों का भी यही हाल है। अधूरे शौचालयों को पूरा दिखाकर कागजों पर ओडीएफ गांवों की संख्या बढ़ा दी गई है। सरकारी आंकड़ों में सिर्फ ढाई सौ शौचालय अधूरे होने की बात कह रहे अफसरों की खानापूरी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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ओडीएफ एक नजर में
कुल शौचालय का लक्ष्य 178788
लक्ष्य के सापेक्ष बने शौचालय 178538
इतनों का होना है निर्माण 250
कुल ओडीएफ के लक्ष्य वाले गांव 1293
अब तक ओडीएफ हुए गांव 1209
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बेस लाइन सर्वें के अनुसार लक्ष्य के सापेक्ष शौचालयों का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। ओडीएफ की तिथि बढ़ाकर 15 अक्टूबर कर दी गई है। ढाई सौ शौचालयों का निर्माण होना बाकी है। वह भी जल्द पूरे कर लिए जाएंगे। - हेमेंद्र सिंह, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन
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