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बाजारीकरण के दौर में भी जिले में तरक्की कर गई खादी

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ट्रेंड बदला तो बुरे दौर में भी तरक्की कर गई खादी
पांच साल में उत्पादन के साथ बढ़ा कारोबार, सौ नए श्रमिक जुड़े
जिले में हर साल एक करोड़ से अधिक का होता है खादी कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। खादी आजादी की लड़ाई में हथियार बनी थी लेकिन बाद में सरकारों की नीतियों व बाजारीकरण के दौर में इसके सामने वजूद का संकट पैदा हो गया। सुकून की बात इतनी भर है कि अपने जिले में खादी के लुढ़कते ग्राफ में पिछले दो वर्षों में बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। जिले में वर्ष 2016-17 में खादी कारोबार 94 लाख रुपये था तो वह खादी फैशन के बदलते ट्रेंड के चलते वर्ष 2017-18 में बढ़कर एक करोड़ रुपये से अधिक हो गया। उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई। 100 नये श्रमिकों के जुड़ने से संख्या बढ़कर 326 हो गई है।
जिले के लोगों में खादी का क्रेज बढ़ा है। खादी के फैशनेबल कपड़े अब फैशन ट्रेंड में है। आज खादी सूती, मसलिन, सिल्क के रंग बिरंगे डिजाइन में भी आने लगी है। यही वजह है कि जिले में खादी का कारोबार बढ़ा है। खुद खादी के क्षेत्रीय कार्यालय के आंकड़े इसके गवाह हैं। खादी को बढ़ावा देने में पूर्व मंत्री हाजी रियाज अहमद की भूमिका को भी खादी पहनने वाले अहम बता रहे हैं। रियाज सपा शासन में वर्ष खादी ग्रामोद्योग राज्यमंत्री रहे।
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जिले में है सात खादी भंडार
जिले में खादी भंडार की स्थापना आजादी से पूर्व हुई थी। सबसे पुराना खादी भंडार स्टेशन रोड पर है। हालांकि अब यह किसी शोरूम जैसा है। मंडी परिसर में भी एक खादी भंडार संचालित है। बीसलपुर, बरखेड़ा, पूरनपुर व बिलसंडा में भी एक-एक खादी भंडार हैं। जिले में खादी उत्पादन भी होता है। बरखेड़ा कस्बे के अलावा पतरसिया, दड़िया गांव में बुनकरों द्वारा सूत तैयार किया जाता है। बरखेड़ा के गांव खमरिया में भी खादी का कपड़ा तैयार किया जाता है जो क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से खादी भंडारों पर भेजा जाता है।
वर्जन
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देश में मोदी सरकार आने के बाद खादी का क्रेज लोगों के बीच बढ़ा है। यह बात सच है कि बाजार हमेशा मुनाफा देखता है, लेकिन हमें महात्मा गांधी के मूल्यों को जीवित रखने के लिए व खादी के पीछे निहित उद्देश्यों को बनाए रखने के लिए आगे आना होगा। - हरेराम पांडेय, प्रबंधक खादी भंडार, पीलीभीत
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खादी के कारोबार में पिछले कुछ साल से बढ़ोत्तरी हुई है। लोगों के बीच खादी लोकप्रिय हुई है। सरकार द्वारा भी सहायता दी जा रही है। यही वजह है कि जिले में खादी के कारोबार व उत्पादन में खासी बढ़ोत्तरी हुई।- राघवेंद्र द्विवेदी, प्रबंधक, क्षेत्रीय कार्यालय
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खादी महोत्सव से भी बढ़ा क्रेज
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मंत्री बनने के बाद मैंने अपने विभाग के कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन खादी की ड्रेस पहनना अनिवार्य कर दिया था। खादी महोत्सव की शुरुआत पीलीभीत से की थी। महोत्सव में पांच करोड़ का कारोबार हुआ था। प्रदेश के अन्य धार्मिक स्थलों पर लगने वाले बड़े मेलों में भी खादी महोत्सव आयोजित कर खादी का प्रचार प्रसार किया। खादी निर्मित सभी वस्तुएं एक ही छत के नीचे मिलें, इसकी भी व्यवस्था की। - हाजी रियाज अहमद, पूर्व मंत्री
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