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स्वच्छता का मचा रहे शोर, कूड़ा तो चारों ओर

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स्वच्छता का मचा रहे शोर, कूड़ा तो चारों ओर

पीलीभीत। साल 2019 के स्वच्छता सर्वेक्षण की दौड़ में एक बार फिर नगर पालिका अपनी आधी अधूरी तैयारी के बीच शामिल होने जा रहा है। शहर को स्वच्छ करने के लिए पालिका प्रशासन जोर शोर से लगे होने का दावा कर रहा है। जिला प्रशासन भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छता मुहिम से जुड़ने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटकों का आयोजन कर रहे हैं। जिससे शहर को बेहतर रैंक दिलाने में लोगों की मदद मिल सकें, लेकिन जमीनी स्तर पर सच्चाई कुछ और ही दिख रही है। नाले हो या फिर नालियां सभी चोक हैं। ऐसे में अगले माह शुरू होने वाले स्वच्छता सर्वेक्षण में पालिका कैसे अच्छी रैंक प्राप्त करेगा? इस पर खुद जिम्मेदारों को भी संशय है।
पालिका प्रशासन भरपूर कोशिश के बाद भी शहर के कूड़े का निस्तारण नहीं खोज पा रहा है। यही वजह है कि शहर की सबसे बड़ी समस्या कूड़ा ही स्वच्छता सर्वेक्षण को झटका दे सकती है। शहर में रोडवेज बस स्टैंड, देवहा नदी के पास, घन्नी ताल वाली रोड, जिला अस्पताल परिसर में कूड़े का ढेर लगा है। कूड़ा निस्तारण करने के बजाए कूड़े के ढेर कम करने के लिए एनजीटी के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए उसमे आग लगा दी जाती है। जिससे धीरे-धीरे यह ढेर राख में तब्दील होकर कम हो जाता है। जलते कूड़े से निकलने वाला धुआं पर्यावरण को तो प्रदूषित कर ही रहा है साथ में मानव शरीर पर भी दुष्प्रभाव डाल रहा है। इधर, पालिका प्रशासन स्वच्छता के शोर में मस्त होकर इन समस्याओं के समाधान से बेखबर होने के साथ ही ओडीएफ और डोर-टू डोर कूडा कलेक्शन के भरोसे रहे गया है।
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महीनों से नहीं उठा कूड़ा
रोडवेज बस स्टैंड, देवहा पुल के पास सालों से कूड़े का ढेर लगता है। बीते कई महीनों से तो शहर भर का कूड़ा रोजाना डाला जा रहा है। इससे बस स्टैंड पहुंचने वालों को भी खासा दिक्कत होती है। स्थानीय दुकानदार राजीव ने बताया कि कूड़ा कम होने के बजाए बढ़ता जा रहा है, निस्तारण न कर पालिका के सफाई कर्मचारी कूड़े में आग लगा देते हैं। कूड़े से दुर्गंध उठने के साथ ही लोग परेशानी झेलते हैं।
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