पीलीभीत। उत्तराखंड की राइस मिलों और आढ़तों की हड़ताल के चलते रविवार को मंडी की बंदी का दिन होने पर भी धान की आवक दर्ज की गई। वहीं सरकारी केंद्र सूने पड़े हैं लेकिन सख्ती से बचने के लिए संबंधित राइस मिलों से मिलकर केंद्र प्रभारी आंकड़ेबाजी कर खरीद दर्शाने में लगे हैं।
धान की कटाई दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। इसके चलते मंडी में धान की बंपर आवक है लेकिन हर बार की तरह ही किसानों को धान का पूरा दाम नहीं मिल पा रहा है। उत्तराखंड की हड़ताल के चलते शनिवार को मंडी में आवक इतनी हो गई कि उसकी देररात तक तौल ही नहीं हो सकी। करीब 10 हजार क्विंटल से अधिक धान बिना तुला रह गया। दूसरे दिन रविवार को अवकाश के बाद भी किसान धान लेकर मंडी पहुंचे। इपर राइस मिलरों और व्यापारियों ने आढ़तों पर पहुंचकर धान की खरीदारी की। लेकिन किसानों को 1275 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक के दाम नहीं मिले। मंगलवार को धनतेरस के चलते सोमवार को धान की आवक और बढ़ने की उम्मीद है। मंडी सचिव विजेन बालियान ने बताया कि रविवार को लगभग पांच हजार क्विंटल की आवक हुई। वहीं सरकारी केंद्र अभी भी सूूने पड़े हैं। मंडी के क्रय केंद्रों पर कभी कभार तौल हो जाती है लेकिन क्षेत्र के किसी भी केंद्र पर तौल होती नहीं दिख रही। इसके बावजूद सरकारी आंकड़ों में खरीद दिख रही है। सूत्रों की मानें तो क्रय केंद्र प्रभारियों ने केंद्र से अटैच की गई राइस मिलों से मिलकर खेल शुरू कर दिया। मिलों द्वारा की जा रही सीधी खरीद के धान को सरकारी अभिलेखों में दर्ज कर अपने परिचित किसानों के खातों में धनराशि भेजी जा रही है। डिप्टी आरएमओ अवनीश झा ने बताया कि सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद हो रही है। जो धान मानक के अनुरूप 17 प्रतिशत नमी तक मिल रहा उसकी खरीद की जा रही है।