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रोडवेज में महिलाओं की भागीदारी बढ़नी चाहिए

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पीलीभीत। उत्तर-परिवहन निगम के पीलीभीत डिपो में 200 परिचालक और 182 चालक हैं। मगर इनमें महिलाओं की भागीदारी पांच प्रतिशत भी नहीं है। अगर परिचालकों की बात करें तो महिलाओं की संख्या तीन है पर चालक एक भी नहीं है। जबकि प्रदेश के कई जनपदों में रोडवेज की पिंक बस सेवा शुरू हुई तो कई महिलाएं चालक बन कर सामने आईं। अब बसें चलाकर वे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहीं। सोमवार को जब पीलीभीत डिपो की महिला परिचालकों से बातचीत की गई तो उन्होंने अपने अनुभव सुनाए और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की वकालत भी की। एआरटीओ अमिताभ राय का कहना था कि परंपरावादी सोच से पूरे समाज को बाहर निकलने की जरूरत है। तभी समाज में बदलाव होगा। महिलाओं की भागीदारी परिवहन के क्षेत्र में और बढ़ेगी। इसके साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए आधारभूत सुविधाओं का विकास कराने की भी जरूरत है।
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मैं रोडवेज में स्थायी कंडक्टर हूं और बस में चलकर मैंने देखा कि ऐसे लोग भी मिलते हैं जिन्हें महिलाओं से बातचीत करने की तमीज नहीं होती लेकिन ऐसे लोग भी खूब मिलते हैं जो महिलाओं को हर तरह की जॉब के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
ऐसे में मेरा यही कहना है कि अगर आपकी रुचि है तो कंडक्टर बनकर देखिए और साबित कर दिखाइए कि महिला किसी से कम नहीं होती।
- सोनी गंगवार, परिचालक
मैंने पांच वर्ष पहले परिचालक की नौकरी ज्वॉइन की तब झिझक थी लेकिन अब ऐसा नहीं है। मैं तो उस दिन की कल्पना कर रही हूं। जब चालक और परिचालक दोनों ही महिलाएं हों। ड्यूटी करना आसान होगा और महिलाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा। परिवहन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से समाज में बराबरी की भावना का विस्तार होगा।
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- सुलक्षणा, परिचालक
महिलाओं के नाम ड्राइविंग लाइसेंस चौथाई से कम
पीलीभीत। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के ड्राइविंग लाइसेंस चौथाई संख्या में भी नहीं हैं। जिले में कुल 176611 लाइसेंस हैं। इसमें महिलाओं के लाइसेंस की संख्या 4000 ही है। अधिकतर महिलाएं दुपहिया वाहन चलाती है। उच्च आय वर्ग की महिलाएं कार चलाती हैं। अभी ऑटो, टैक्सी और भारी वाहन ट्रक व बस आदि चलाने वाली महिलाओं की संख्या शून्य है।
सारथी-4 डेटाबेस की रिपोर्ट के अनुसार पीलीभीत जनपद
वाणिज्यिक वाहनों की कुल संख्या- 6940
टू- व्हीलर की संख्या-257600
चौपहिया वाहनों की संख्या-16512
कुल ड्राइविंग लाइसेंस-176611
महिला-4000
(आंकड़े एआरटीओ अमिताभ राय से हुई बातचीत के अनुसार हैं। एआरटीओ ने बताया कि करीब 40,000 लोग ऐसे हैं जिनके नाम चार पहिया और दो पहिया वाहन चलाने के लाइसेंस हैं। महिलाओं की परिवहन क्षेत्र में भागीदारी बेहद कम है। भारी वाहन चलाने वाली महिलाएं महानगरों तक ही सीमित हैं)
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