पीलीभीत। एक बार फिर से स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 की परीक्षा शुरू हो चुकी है। इस बार यह तो तय है कि रैंकिंग सुधरेगी, लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि टॉप-10 शहरों की सूची में स्थान मिल पाएगा या नहीं। सर्वेक्षण में नगर पालिका परिषद प्रशासन ने अपनी लाज बचाने को तैयारियां तो की हैं, लेकिन आधी अधूरी। इसकी वजह से सर्वेक्षण के दौरान अंक कटने का खतरा मंडरा रहा है। इधर, नगर पालिका प्रशासन का दावा है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में इस बार अच्छी रैंक मिलेगी। हालांकि सर्वेक्षण के परिणामों से सारी स्थिति अपने आप साफ हो जाएगी।
पांच हजार अंकों की स्कोरिंग
स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में बदलाव किया गया है। इस बार यह सर्वेक्षण चार जनवरी से 31 जनवरी के बीच किया जा रहा है। पहले जहां स्वच्छता सर्वेक्षण में कुछ अंक 4000 थे, वहीं इस बार 5000 अंक रखे गए हैं। सर्वे को चार भागों में बांटा गया है, इसमें सत्यापन, प्रत्यक्ष अवलोकन, नागरिक प्रतिक्रिया समेत सेवा स्तर प्रगति के समान रूप से 1250-1250 अंक रखे गए हैं। इसमें प्रमाणों का नया हिस्सा जोड़ा गया है।
पालिका की तैयारियों पर एक नजर
स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर टीम शहर का औचक दौरा कर वेरिफिकेशन करेगी और उसी रिपोर्ट के आधार पर रैकिंग तय होगी। फिलहाल नगर पालिका द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर तैयारियां पहले से ही की जा रही है, लेकिन अभी भी कुछ तैयारियां आधी अधूरी हैं। अमर उजाला ने तैयारियों की पड़ताल की तो यह तस्वीर नजर आई।
इन बिंदुओं पर रह गईं खामियां
स्वच्छता एप-
स्वच्छता एप की डाउनलोडिंग में भी नगर पालिका को अंक दिए जाने हैं। फिलहाल इस मामले में हालत काफी पतली है। पालिका प्रशासन के मुताबिक अभी तक करीब 500 लोगों ने ही स्वच्छता एप डाउनलोड किया है।लोगों को स्वच्छता एप डाउनलोड करने के लिए जागरूक करने की कोई पहल होती नहीं दिख रही है।
शौचालय-
शासन द्वारा शहर को 1283 शौचालयों का लक्ष्य मिला था। पालिका प्रशासन के मुताबिक 1200 शौचालय बन चुके हैं, वहीं 83 शौचालय अधूरे पड़े हैं। वहीं पालिका प्रशासन द्वारा एक पिंक टॉयलेट और तीन सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इस सबके बावजूद शहर के बाहरी इलाकों में बसी आबादी आज भी खुले में शौच जा रही है।
डस्टबिन-
इस बिंदु के तहत नगर पालिका को शहर के सभी प्रमुख स्थानों, चौराहा व बाजारों में डस्टबिन की व्यवस्था करनी थी। इसको लेकर पालिका प्रशासन 250 नए डस्टबिन मंगाए थे, लेकिन ढाई लाख की आबादी वाले शहर में पालिका अभी 250 डस्टबिन लगवाने का कार्य पूरा नहीं कर सकी है।
खुले में कूड़ाघर
नगर पालिका की ओर से चंद दिन से ही इस दिशा में प्रयास किए गए हैं। शहर में करीब 28 स्थानों पर बने अस्थाई डलावघरों में कूड़ा डाला जा रहा है। कुछ दिन पूर्व ही स्थाई डलावघर की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही 28 में से चार अस्थाई डलावघरों को समाप्त किया गया है। इस दिशा में कार्य होना बाकी है। कूड़ा उठान की व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
इन बिंदुओं पर अच्छी स्कोरिंग की संभावना-
जीपीएस-
कचरा वाहनों में जीपीएस लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। पालिका प्रशासन के मुताबिक 13 कचरा वाहनों को जीपीएस से लैस किया गया है। वहीं सफाई कर्मियों की हाजिरी के लिए बायोमेट्रिक मशीन व्यवस्था भी की जा चुकी है।
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन
शहर में 23 नबंवर से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य बतौर ट्रायल शुरू कराया जा चुका है। सभी 27 वार्डों में ठेका मजदूरों के माध्यम से कूड़ा कलेक्शन कराया जा रहा है। पालिका प्रशासन के मुताबिक कूड़ा कलेक्शन का कार्य ठेके पर दिया जाएगा। इसको लेकर एक प्राइवेट फर्म ने सर्वे शुरू किया है।
रात्रिकालीन सफाई
नगर पालिका की ओर से शहर के कार्मिशियल क्षेत्र में रात्रिकालीन सफाई व्यवस्था पूर्व से ही शुरू कराई जा चुकी है। स्थिति भले ही बेहतर न हो, लेकिन इस दिशा में कदम जरुर उठाए गए हैं। इस बिंदु पर भी मार्क मिल सकते हैं।
रिकार्ड अपडेशन
सर्वेक्षण के तहत डाक्यूमेंटेशन प्रजेंटेशन के भी अंक निर्धारित है। इस दिशा में नगर पालिका की ओर से तैयारियां पूरी की जा चुकी हैं। उम्मीद है कि सर्वे के इस बिंदु पर नगर पालिका को बेहतर अंक मिल सकते हैं।
स्वच्छ सर्वेक्षण को लेकर नगर पालिका द्वारा काफी पहले से तैयारियां की जा रही हैं। रात्रिकालीन सफाई, डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन पहले से ही किया जा रहा है। बेहतर अंक पाने की मुहिम में शहरवासियों का भी सहयोग बेहद जरूरी है। उम्मीद है कि इस बार बेहतर रैंक मिलेगी।
- विमला जायसवाल, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद