टाइगर रिजर्व के लिए शासन से चार हाथी दिए जाने को मंजूरी मिली थी। इसकी प्रक्रिया पिछले चार माह से चल रही है लेकिन अभी तक टाइगर रिजर्व को हाथी नहीं मिले हैं। हाथियों को मंगाने के लिए ई-टेडर कर ट्रांसपोर्टर का निर्धारण किया जा रहा है। चार हाथियों को लाने में 28 लाख अधिक खर्च होने की उम्मीद है।
पीलीभीत के जंगलों को करीब तीन साल पूर्व टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इन तीन सालों में टाइगर रिजर्व को सुरक्षा और संसाधन उपलब्ध कराए जाने थे, लेकिन अभी तक आधे अधूरे संसाधनों से ही काम चलाया जा रहा है। अबतक जंगल से सटे क्षेत्रों में बाघ के हमलों में 19 लोगों की मौत हो चुकी है। इन हमलों के दौरान खूनी बाघ को पकड़ने एवं सर्च आपरेशन के लिए दुधवा से चार हाथी मंगाने पड़े थे। इससे पूर्व में भी गई बार दुधवा से हाथी मंगाए गए। इस पर 16 अगस्त को मुख्यमंत्री के पीलीभीत दौरे के बाद शासन ने टाइगर रिजर्व को चार हाथी मुहैया करने को स्वीकृति दी थी। दरअसल शासन ने कर्नाटक से 12 हाथी खरीदे हैं जिनमें आठ दुधवा नेशनल पार्क और चार पीलीभीत टाइगर रिजर्व को मिलने हैं। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद वन विभाग ने इसे मंगाने की तैयारियां शुरू की। एनटीसीए से अनुमति लेने के बाद कर्नाटक से हाथियों को मेडिकल परीक्षण कराने सहित तमाम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इसी माह के चारों हाथी के पीलीभीत पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
कर्नाटक से चार हाथियों को मंगवाने में सबसे बड़ी दिक्कत परिवहन को लेकर हो रही है। कई राज्यों से होकर गुजरने और इस दौरान रात्रि विश्राम करने के लिए विभाग को रास्ते में पड़ने वाले सभी राज्यों से एनओसी लेनी पड़ रही है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट के लिए ई-टेंडर जारी किया गया है। माना जा रहा है कि हाथियों के कर्नाटक से पीलीभीत पहुंचने तक 28 लाख से अधिक खर्च आएगा।
रहने खाने को भी जारी होगा बजट
शासन से अनुमति मिलने के बाद हाथियों को मंगाने की प्रक्रिया अंतिम दौर में चल रही है लेकिन स्थानीय स्तर पर उनके रहने खाने के लिए अभी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। दरअसल शासन से इसके लिए अभी अलग से कोई बजट नहीं दिया गया है। संभवत: हाथियों के आने बाद ही बजट जारी होगा।
कर्नाटक से 12 हाथी मंगाए जा रहे हैं जिसमें चार पीलीभीत टाइगर रिजर्व को मिलेंगे। प्रक्रिया चल रही है जल्द हाथी पीलीभीत पहुंचेंगे।
विनोद कृष्ण सिंह, वन संरक्षक