योगी राज का जादू, किसान के पास धान नहीं फिर भी बढ़ रही खरीद
मंडी में घट रही आवक, फिर भी बढ़ रहा धान खरीद का सरकारी ग्राफ
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन तो हुए, लेकिन व्यवस्थाएं नहीं बदलीं। धान की सरकारी खरीद की बात करें तो सिस्टम में कोई बदलाव नहीं हुआ। ई-टेडरिंग की व्यवस्था भी धड़ाम हो गई। स्थानीय ठेकेदारों को बिचौलिया बनाकर सरकारी धान खरीद की आंकड़ेबाजी की जा रही है। जब खेत-खलिहान से लेकर धान भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़कों पर दौड़ती दिखाई देती थीं, मंडी समिति से लेकर गांवों में खुले अधिकांश क्रय केंद्रों पर किसानों की भीड़ दिखाई देती थी, तब सरकारी खरीद का आंकड़ा काफी धीमी गति से बढ़ रहा था। अब जब किसान के पास धान खत्म हो चुका है और मंडी में भी आवक नाम मात्र की रह गई है तो सरकारी क्रय केंद्रों पर धान खरीद का आंकड़ा बढ़ना खुद में एक सवाल है। पिछले 24 घंटे की बात करें तो खरीद में चार प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि खरीद शुरू होने के प्रथम एक महीने में मात्र आठ प्रतिशत खरीद ही हुई थी।
तराई के इस जनपद में धान की कटाई सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर अक्तूबर के अंत तक चलती है। मात्र 3-4 प्रतिशत किसान की ऐसे हैं जो धान की कटाई नवंबर माह के प्रथम सप्ताह तक करते हैं। वर्तमान में किसान गेहूं की बुआई व्यस्त हैं और जिनकी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खाली हैं वह गन्ना ढुलाई में लगी हुई हैं। इसके चलते पिछले करीब एक सप्ताह से मंडी में धान की आवक काफी घट गई है। शनिवार को मंडी में लगभग 10 हजार क्विंटल धान की आवक दर्ज की गई। जब मंडी में आवक नहीं है तो क्रय केंद्रों पर धान कहां से आ रहा है? यह अपने आप में बड़ा सवाल है, लेकिन हैरानी की बात ये है कि क्रय केंद्रों के सूने पड़े होने के बाद भी सरकारी धान की खरीद दिनोंदिन बढ़ रही है। आंकड़ों की बात करें पिछले 24 घंटे में धान की खरीद 30 प्रतिशत से बढ़कर 34.02 प्रतिशत हो गई। यानी एक एक दिन में चार प्रतिशत खरीद बढ़ गई।
स्थलीय निरीक्षण हो तो खुल जाएगी पोल
जिले में धान खरीद के लिए अधिकारियों और व्यापारियों की सांठगांठ से जो सिस्टम बना हुआ है उसके तहत राइस मिलों पर व्यापारियों द्वारा खरीदे गए धान को क्रय केंद्र प्रभारी हैंडलिंग की मदद से परिचित किसानों के नाम दर्ज कर उन्हीं के खाते में धनराशि भेज देते हैं। बाद में खाते से धनराशि निकालकर बंदरबांट कर ली जाती है। इसमें कई ऐसे किसान भी हैं जिनके खेतों में गन्ना, पॉलेज अथवा अन्य फसलें खड़ी हैं, लेकिन उनके नाम से खरीद दर्शायी जा रही है। इस खरीद का खतौनी से मिलाकर स्थलीय निरीक्षण कर लिया जाए तो हकीकत सामने आ सकती है।
नहीं मिलता फसल का पूरा दाम
सरकार पांच साल में किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है। मेरा कहना है कि सरकार किसानों को उसकी फसल का वाजिब और पूरा दाम ही दिलवा दें वहीं काफी है।
मोहम्मद सादिक, जसोली, बरखेड़ा
पंजाब पैटर्न पर हो धान खरीद
क्षेत्र में धान की खरीद न होने के चलते मंडी आकर आढ़त पर धान बेचना पड़ रहा है। सरकार को पंजाब पैटर्न पर धान खरीद शुरू करनी चाहिए ताकि किसानों को वाजिब मूल्य मिल सके।
गुरमेज सिंह, गोमती गुरुद्वारा, पूरनपुर