...तो बिचौलिये पूरा करेंगे धान खरीद का लक्ष्य
प्रशासन ने करीब 20 हजार किसानों को जारी किये नोटिस
30.66 लाख एमटी के सापेक्ष मात्र 12,500 क्विंटल हुई सरकारी खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। सरकारी धान खरीद को एक माह पूरा होने को आ गया है, लेकिन धान की खेती के लिए दूर-दूर तक मशहूर जिले में इसकी स्थिति काफी बद से बदतर है। इसमें कोई सुधार नहीं हो रहा है। लक्ष्य के सापेक्ष एक फीसदी भी धान की खरीद नहीं हो सकी है। किसान परेशान है और बिचौलिये मौज मार रहे हैैं। मजबूरी में बिचौलियों, आढ़तियों और राइस मिलर्स को किसान औने पौने दाम में धान बेच रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी खरीद का लक्ष्य बिचौलिये पूरा कराएंगे।
योगी सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1750 रूपये प्रति क्विंटल तो तय कर वाहवाही तो लूटी कि वे किसान हितैषी हैं, बावजूद किसानों को 400-500 रुपये प्रति क्विंटल तक कम कीमत पर धान बेचना पड़ा रहा है। सरकार ने इस बार पारदर्शिता लाने को किसानों से पंजीकरण कराना अनिवार्य किया है। लेकिन अफसर वह भी पूरा नहीं करा सके। इसी का नतीजा है कि करीब बीस हजार किसानों को नोटिस जारी करना पड़ा।
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तो क्या नोटिस जारी कर पूरा होगा लक्ष्य
जिले में धान खरीद के लिए किसानों का पंजीकरण कराना अनिवार्य किया गया है। बीते साल 28 हजार किसानों ने धान बेचा था। इसके सापेक्ष इस बार महज 8100 पंजीकरण हुए है। पंजीकरण कम होने के पर कारण एडीएम प्रशासन बृज किशोर के निर्देश पर पंजीकरण नहीं कराने वाले करीब बीस हजार किसानों को लेखपाल के माध्यम से नोटिस जारी कर पूछा गया कि उन्होंने अपना पंजीकरण क्यों नहीं कराया। अभी तक महज साढ़े बारह हजार क्विंटल धान की सरकारी खरीद हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसान धान सरकारी क्रय केंद्रों पर नहीं बेचेगा तो धान खरीद का लक्ष्य जोकि 30.88 लाख एमटी है वो कैसे पूरा होगा।
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कागजों पर चल रहा क्रय केंद्र
29 पीबीटीपी-7
सरकारी क्रय केंद्र केवल कागजों पर चल रहे हैं। प्रभारी नौकरी बचाने की खातिर नाममात्र का धान तौल करने में लगे है। किसानों की आय दोगुनी को बात कही जा रही है, लेकिन यहां अफसरों की मिलीभगत के कारण धान औने पौने दाम में बेचना पड़ रहा है। रविंद्र सिंह, चांदूपुर पूरनपुर
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राइस मिलर्स को फायदा पहुुंचाना मकसद
29 पीबीटीपी-8
अफसरों का मकसद सिर्फ राइस मिलर्स को फायदा पहुंचाना है। अफसरों की मनमानी के आगे किसान बेबस है। बरेखड़ा विधायक के निरीक्षण के बाद भी नमी का खेल जारी है। औने पौने दाम में धान बेचना पड़ा।
सुखलाल, पंडरी
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जिले के हिसाब से तय हो नीति
29 पीबीटीपी-15
सरकार को हर जिले की धान खरीद की नीति वहां के वातावरण के हिसाब से करनी चाहिए। तभी किसान को इसका लाभ मिल सकेगा। 90 प्रतिशत किसान गीला धान लेकर पहुंच रहे है। इसलिए उनको औने पौन दाम में धान बेचना पड़ रहा है। सरकार का अगर अपनी नीति बदलेगी तो निश्चत किसानों को फायदा मिलेगा।
अभिषेक सिंह, युवा जिलाध्यक्ष उ0प्र उद्योग व्यापार मंडल
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वर्जन-
जिन्होंने पिछले साल सरकारी धान क्रय केंद्र पर अपना धान बेचा था। उनमें करीब बीस हजार किसानों ने पंजीकरण नहीं कराया। ऐसे किसानों को लेखपाल के माध्यम से नोटिस जारी कर पंजीकरण कराने के लिये कह गया है। अगर वे पंजीकरण नहीं कराते तो यह समझा जायेगा कि वो अपना धान क्रय केंद्र पर बेचना नहीं चाहते। पंजीकरण सिस्टम लागू करने की वजह से अधिकांश किसान नहीं आ रहा है।
बृज किशोर, एडीएम प्रशासन
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फैक्ट फाइल
जिले में कुल क्रय केंद्र-88
इतने क्रय केंद्रों पर हुई धान खरीद-32
धान खरीद का लक्ष्य-30.88 एमटी
अब तक हुई खरीद- 12,500 क्विंटल
बीते साल धान बेचने वाले किसान-28,000
पंजीकरण कराने वाले किसान-8100
अभी तक इतनों को मिला लाभ-164