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सावधान! यहां भी स्कूल के लाडले नहीं हैं सुरक्षित

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सावधान! यहां भी स्कूल के लाडले नहीं हैं सुरक्षित
बेहतर शिक्षा की परवाह में सुरक्षा को भूले अभिभावक
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। उज्ज्वल भविष्य देने के लिए हर कोई बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने पर जोर दे रहा है। इसमें किसी तरह का कोई समझौता नहीं होने दिया जाता। अफसोस लाडलों को बेहतर शिक्षा देने की होड़ में उनकी सुरक्षा को लापरवाही दिखाई देती है। स्कूल प्रबंधन से लेकर अभिभावक तक सभी औपचारिकता निभाने में जुटे हैं। स्कूूली वाहनों की फिटनेस ठप पड़ी है, तो वहीं उसमें बच्चों की संख्या भी काफी अधिक रहती है। बृहस्पतिवार सुबह कुशीनगर में हुए हादसे की तरह ही जिले में 57 मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं, जिनको लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। यह कभी भी दुखद हादसे का सबब बन सकती हैं। करीब तीन साल पहले टिकरी स्थित मानव रहित क्रासिंग को पार करते समय एक ट्रैक्टर ट्रेन की चपेट में आ गया था। जिसमें ट्रैक्टर के परखचे उड़ गए थे व चालक की मौके पर ही मौत हो गई थी। बरहा समेत कई मानवरहित क्रासिंग पर कई बार लोग घायल हो चुके हैं। उधर स्कूल से बच्चों को लाने व ले जाने वाले अधिकांश वाहन खुद में भी फिट नहीं रहते। अमर उजाला ने बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने को लेकर बरती जा रही लापरवाही को अपने कैमरे में कैद किया। प्रस्तुत है एक रिपोर्ट...।
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26 पीबीटीपी-3
स्कूली वाहनों के नियमों को ताक पर रख प्राइवेट मैजिक चालक बच्चों को भूसे की तरह ठूस कर ले जाते हैं। जिन्हें न तो स्कूल प्रशासन देखता है और न ही अभिभावक। जिससे बच्चों को काफी दिक्कत होती है।
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26 पीबीटीपी-4
शहर के एक भी स्कूल में मानक के अनुरूप वाहन नहीं चल रहे हैं। स्कूल संचालकों ने बच्चों को ले जाने व लाने के लिए तो वाहन तो हायर कर रखे हैं, लेकिन वह मानक के अनुरूप हैं भी कि नहीं स्कूल प्रशासन नहीं देखता। इस तस्वीर को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चे एक हल्का भी झटका लगने से गिर सकते हैं।
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26पीबीटीपी-5
ई-रिक्शा चालक की मनमानी भी कम नहीं दिखती है। सारे नियमों को दरकिनार कर चालक ने बच्चों को अपने बराबर वाली सीट पर बैठा रखा है। शहर के भीड़भाड़ वाले चौराहों से निकलने के बाद भी जिम्मेदार ई-रिक्शा चालक को समझाने की कोशिश तक नहीं करते।
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26 पीबीटीपी-6
खटरा मैजिक में स्कूली बच्चे सफर कर अपनी जान को खतरे में डाल रहे हैं। मैजिक में मानक से अधिक बच्चों को भूसे की तरह ठूस कर भर रखा है। मैजिक का पिछला दरवाजा भी रिपेयर कर रखा है। मानों चालक के लिए नियम कानून है ही नहीं।
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26 पीबीटीपी-7
इस रिक्शा पर बैठे बच्चों की तस्वीर भी किसी खतरे से कम नहीं है। स्कूल की छुट्टी होने के बाद जान जोखिम में डालकर बच्चे घर लौट रहे हैं। रोजाना इतने ही बच्चे रिक्शा से स्कूल छोड़े जाते हैं। रिक्शा पर बच्चों की सेफ्टी के लिए अलग से कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
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अभिभावक रखें ये सावधानी
-बस खड़ी होने पर ही बच्चों को बस के अंदर चढ़ाएं, हड़बड़ी में न भेजें।
-ड्राइवर की हरकतों पर नजर रखें। इस बात का खास ध्यान रखें कि कहीं ड्राइवर नशे में तो नहीं है।
-बस में कंडक्टर के साथ जिम्मेदार शिक्षक नहीं होने पर तुरंत प्रबंधन से शिकायत करें।
-यदि समय पर बस नहीं पहुंचती है तो प्रबंधन से जरूर संपर्क करें।
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वर्जन-
मानक पर खरा नहीं उतरने वाले स्कूल वाहनों के खिलाफ पिछले दिनों अभियान चलाकर कार्रवाई की गई थी। मैजिक, स्कूल वैन सहित अन्य वाहनों में मानक से अधिक बच्चे ले जाने वाले वाहन सीज कर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए शीघ्र ही अभियान चलाया जाएगा।
राजेश गंगवार, एआरटीओ प्रशासन
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