पूरनपुर/पीलीभीत। पूर्व माध्यमिक स्कूल नवदिया टोडर में तैनात शिक्षक बादशाह को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मनित किया जाएगा। प्रदेश के सम्मानित होने वाले 25 शिक्षकों में बादशाह का नाम चयन सूची में है। सम्मानित होने वाले शिक्षक बादशाह की खासियत यह है कि वह स्कूल जाने के लिए घर से सात किलोमीटर पैदल दूरी तय करते हैं। सम्मानित होने के लिए वह रविवार को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इससे पहले नगर के शिक्षक धर्मसिंह चौहान और दुजाराम को राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया था।
मूलरूप से थाना बरखेड़ा के गांव कोकिला में मंगली प्रसाद और देवकी देवी के घर 15 जुलाई 1958 को जन्में बादशाह पांच भाई और तीन बहनों में सबसे बड़े हैं। वह करीब दो दशक पूर्व नगर के मोहल्ला साहूकारा (लाइनपार) में आकर बस गए। बदशाह ने बीटीसी प्रशिक्षण के बाद नगर के एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षण कार्य किया। मार्च 1991 में प्राइमरी स्कूल लोधीपुर में उनकी तैनाती हुई। कर्म को ही पूजा मानने वाले शिक्षक बादशाह शुरू से ही गुणवत्ता परक शिक्षा के पक्षधर रहे। बच्चों को विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराने को प्रयासरत रहकर वर्ष 1991 से होने वाली विभिन्न स्तर की खेलकूद प्रतियोगिताओं में स्कूली बच्चों को शामिल कराया। जिला स्तर तक की पीटी प्रतियोगिता मेें उनके स्कूल की टीम अधिकांश बार पहले स्थान पर रही। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने को उन्होंने प्राइमरी स्कूलों मेें तैनाती के दौरान वार्षिकोत्सव समारोहों का आयोजन कराया। स्कूली बच्चों के अच्छे प्रदर्शन को लेकर उनको कई बार डीएम स्तर तक और एक बार शिक्षा मंत्री ने भी सम्मानित किया। करीब तीन साल पहले उपाधि महाविद्यालय में हुए समारोह में उनको पीलीभीत रत्न दिया गया। स्कूली बच्चों के अच्छे प्रदर्शन को लेकर उनके स्कूल के बच्चों की टीम ने राज्य स्तर की शाहजहांपुर में हुई खेलकूद में भाग लेकर स्थान पाया।
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सात किलोमीटर की दूरी तय करते है बादशाह
पूरनपुर। शिक्षक बदशाह की तैनाती वर्तमान में नवदिया टोडर के पूर्व माध्यमिक स्कूल में है। बाइक और कार चलाना तो दूसर वह साइकिल तक नहीं चलाना जानते हैं। स्कूल जाने को उनको माधोटांडा रेलवे क्रासिंग से सवारी मिलती है। ऐसे में घर से माधोटांडा रेलवे क्रासिंग तक वह पैदल दूरी तय करते है। माधोटंाडा को जाने वाले वाहन से स्कूल जाने को उनको गांव जरा उतरना पड़ता है। जरा से उनके स्कूल की दूरी ढ़ाई किलोमीटर है। ऐसे में अक्सर उनको स्कूल आवागमन को सात किलोमीटर दूरी पैदल तय करनी पड़ती है।