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सात नमूने फे ल होने के बाद भी मैगी पर नहीं लगा प्रतिबंध

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05 पीबीटीपी 15
सात नमूने फेल होने के बाद भी मैगी पर प्रतिबंध नहीं
एक साल में 75 लाख रुपये की मैगी की होती है बिक्री
टेस्ट मेकर में मानक से अधिक मिल रही भस्म
अमर उजाला ब्यरो
पीलीभीत। दो साल पहले शाहजहांपुर में नेस्ले कंपनी के लोकप्रिय ब्रांड मैगी की जांच में नमूने फेल होने पर भले ही सरकार की ओर से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सक्रियता बरती गई, लेकिन इसका असर जिले में नहीं मिला। छह महीने में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने छापेमारी के दौरान विभिन्न दुकानों से मैगी नूडल्स के सात नमूने जांच के लिए भेजा था। जांच रिपोर्ट में मैगी के साथ मिलने वाले टेस्ट मेकर में भस्म की मात्रा मानक से अधिक पाई गई जिस पर मुकदमा दर्ज कराया गया। प्रशासन ने मुकदमा दर्ज तो करा दिया लेकिन इसकी बिक्री रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए। अभी भी बदस्तूर इसकी बिक्री जिले में जारी है।
जिले में लगभग 500 छोटी-बड़ी कन्फेक्शनरी की शॉप है जिनपर मैगी बिकती हैं। प्रत्येक माह करीब सवा क्विंटल मैगी की बिक्री जनपद में हो रही है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अभिहीत अधिकारी वीके वर्मा ने बताया कि सात दुकानों से टीम ने नेस्ले कंपनी की मैगी के सेंपल लिए थे, जिनमें पांच दुकानें पीलीभीत और दो दुकानें पूरनपुर की थी। मैगी नूडल्स के इन नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया। प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में नमूनों को अधोमानक घोषित किया। रिपोर्ट के मुताबिक नमूनों की जांच रिपोर्ट में मैगी के साथ मिलने वाले टेस्ट मेकर (मसाला) में ऐस (भस्म) की मात्रा अधिक पाई गई। नियमानुसार यह मात्रा एक प्रतिशत होनी चाहिए जबकि यह इसमें अधिक पाई गई थी।
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व्यापारी के बोल-
मैगी के होलसेल विक्रेता ब्रजेश दयाल ने बताते है कि मैगी में कभी मिलावट नहीं थी। ब्रांडेंड कंपनी का प्रोडक्ट होने के चलते बिक्री पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। दो साल पहले शाहजहांपुर में मैगी में मिलावटी की शिकायत के बाद छह महीने के लिए मैगी बनाने वाली छोटी कंपनियों को नेस्ले कंपनी की मैगी बंद करने का सीधे तौर पर फायदा पहुंचा था, जिसके कुछ समय तक तो बाजार में मुद्दा रहा लेकिन कुछ समय बाद ही बिक्री सामान्य हो गई।
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डाक्टर बोले
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जिला अस्पताल के सीनियर फिजिशयन डॉ. सीबी चौरसिया ने बताया कि भस्म की एक निश्चित मात्रा मान्य है। अधिक होने पर इससे पूरे शरीर को नुकसान होता है। हल्के-हल्के इसका असर किडनी, लीवर और ब्रेन पर पड़ता है जो इंसान के शरीर को प्रभावित कर तकलीफ देय बन जाती है।
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मैगी के टेस्ट मेकर का नमूना जांच में अधोमानक पाया गया था। ऐसे मेें इसकी बिक्री रोकने का कोई प्राविधान नहीं है और न ही शासन से कोई आदेश मिला है। जो नमूने जांच में हानिकारक पाए जाते हैं उन्हीं की बिक्री प्रतिबंधित करने का नियम है। मुकदमा चल रहा है। निर्णय के अनुसार कार्रवाई होगी।
वीके वर्मा, अभिहीत अधिकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन
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महिपाल/मुनिराज
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