बेसिक शिक्षा विभाग में तमाम ऐसे जर्जर स्कूल भवन हैं, जहां सैकड़ों बच्चे
अध्ययनरत हैं। यदि समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया गया तो कभी बड़ा हादसा
हो सकता है।
जिले में 1230 प्राथमिक व 570 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं।
इनमें कई स्कूल भवन ऐसे हैं जो वर्षों पुराने होने के चलते जर्जर हो चुके
हैं। हालांकि इनमें कुछ जर्जर भवनों को निष्प्रोज्य घोषित कर दिया गया है
लेकिन बच्चों की आवाजाही इन भवनों में होती रहती है। इसमें सबसे बड़ी
लापरवाही खंड शिक्षा अधिकारियों की है, जिन्होंने जर्जर भवनों की सूचना
बेसिक शिक्षा अधिकारी को नहीं दी।
बीएसए ने भी ज्यादा गहराई में जाने
की जरुरत नहीं समझी। यदि गहराई से पड़ताल कराई जाए तो जिले में तकरीबन 150
से ऊपर ऐसे स्कूल हैं जो जर्जर हो चुके हैं और उनमें बच्चे भी पढ़ रहे हैं।
हालांकि जर्जर स्कूल भवनों में अतिरिक्त कक्षा कक्षों का निर्माण कराया
गया है लेकिन पड़ोस में जर्जर भवन होने के चलते पढ़ने वाले बच्चों के साथ
कभी भी कोई हादसा हो सकता है।
इधर बीएसए अंबरीष कुमार यादव ने बताया कि
हाल ही में 11 प्राइमरी स्कूलों व तीन जूनियर हाईस्कूलों में निष्प्रोज्य
भवनों की नीलामी कराने के निर्देश खंड शिक्षा अधिकारियों को दिए गए हैं।
इनके स्थान पर जल्द ही अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया जाएगा।
बीसलपुर।
बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते
तमाम विद्यालय भवन काफी जर्जर हालत में हैं, जहां विद्यार्थियों और स्टाफ
को काफी खतरा बना रहता है। यद्यपि जागरुक अभिभावकों ने इस ओर संबंधित
विभागीय उच्चाधिकारियों का ध्यान कई बार आकर्षित कराया, लेकिन अभी तक कोई
सुनवाई नहीं हुई, जिससे अभिभावकों में रोष है।