पीलीभीत। विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर पीलीभीत जिला अस्पताल ने एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। जहां बीते एक साल में 139 मरीजों ने समुचित इलाज और चिकित्सकीय देखरेख के चलते इस खतरनाक बीमारी को मात दी। यह आंकड़ा न सिर्फ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति को दर्शाता है, बल्कि मरीजों में जागरूकता और आत्मबल की भी तस्वीर पेश करता है।
पीलीभीत मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस (काला पीलिया) से लड़ने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। बीते वर्ष भर में कुल 139 मरीजों ने अस्पताल में इलाज के दौरान इस बीमारी को पूरी तरह से हराया। ये मरीज नियमित रूप से दवा लेते रहे, परामर्श से जुड़े और चिकित्सकों की सलाह पर जीवनशैली में बदलाव लाए। सबसे बड़ी बात, मरीजों को लखनऊ से आने वाली विशेष दवाएं समय से उपलब्ध कराई जाती हैं, जो उनके उपचार में बेहद असरदार साबित हो रहीं हैं।
वायरल लोड की जांच की सुविधा फिलहाल पीलीभीत में नहीं है, लेकिन जिला अस्पताल मरीजों के सैंपल लेकर बरेली, लखनऊ जैसे उच्च स्तरीय संस्थानों को भेजता है। इससे बिना किसी रुकावट के मरीजों को समय पर इलाज मिल रहा है। इस एक साल में जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस के मरीजों की स्क्रीनिंग, परामर्श और दवा वितरण की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है।
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि समय से जांच और उपचार के जरिए संक्रमण को फैलने से रोका जाए। अस्पताल प्रशासन अब वायरल लोड जांच सुविधा जिले में ही शुरू कराने की दिशा में प्रयासरत है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रमाकांत सागर ने बताया कि हेपेटाइटिस जैसी बीमारी 84 दिन तक मरीज में रहती है, इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की दवा खुराक में कोई भी लापरवाही नहीं बढ़ती है। समय से मरीजों को लखनऊ से दवाएं उपलब्ध कराई गई है। (संवाद)
खल रही टेक्नीशियन की कमी
जिला अस्पताल पीलीभीत में वायरल लोड जांच के लिए मशीन और अन्य संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन प्रशिक्षित टेक्नीशियन न होने से जांच शुरू नहीं हो पा रही है। फिलहाल मरीजों के सैंपल बरेली भेजे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग तकनीकी स्टाफ की तैनाती को लेकर कार्रवाई कर रहा है।