खेकड़ा (बागपत) ।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेत की मिट्टी के स्वास्थ्य की जानकारी दी और किसानों को नियमित रूप से खेत की मिट्टी की जांच कराने की सलाह दी। इससे किसान की लागत घटेगी और उत्पाद बढ़ेगा।
मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र में मृदा दिवस पर किसान गोष्ठी हुई। इसमें कृषि वैज्ञानिक सुरेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में किसानों ने अधिक उपज लेने के लिए रासायनिक खाद का अंधाधुंध प्रयोग कर मृदा की उर्वरा शक्ति को काफी कम कर दिया है। इसके चलते भूमि बंजर होने के कगार पर पहुंच गई है। मिट्टी की उर्वरा क्षमता को परखने के लिए मिट्टी की जांच नियमित रूप से कराना जरूरी हो गया है। इसके लिए मृदा हेल्थ कार्ड से मिट्टी की निशुल्क जांच की जाती है। डॉ. भूपेंद्र कुमार ने बताया कि जिस प्रकार मनुष्य को जीवन जीने के लिये खाने में विटामिन, प्रोटीन की आवश्यकता होती है। उसी प्रकार भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए पोटाश, नाइट्रोजन आदि पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, लेकिन अंधाधुंध दवा और रासायनिक खाद के प्रयोग के कारण मिट्टी के पोषक तत्व खत्म होने लगे हैं। इसका पता किसानों को नहीं लगता है। इसके लिए किसानों को समय समय पर मृदा जांच कराते रहना चाहिए। इससे भूमि के पोषक तत्वों की कमी को दूर किया जा सके। डॉ. सरिता जोशी ने कहा कि शुद्ध भोजन प्राप्त करने के लिए रासायनिक खाद का प्रयोग न कर पशु के गोबर का ही प्रयोग करें। इस दौरान केंद्र प्रभारी डॉ. सरिता जोशी, डॉ. संजय सिंह, डॉ. विकास बालियान, नवोदय लोक चेतना कल्याण समिति के सचिव देवेंद्र धामा, प्रधान पति देवेंद्र सिंह, हरपाल सिंह, विकास, नरेेंद्र, राकेश आदि मौजूद रहे।