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मौत को देखा करीब से, परिजनों से मिलकर फफक पड़े

Fri, 21 Jun 2013 04:20 PM IST
सुधाकर शर्मा, बिसौली
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चारधाम की यात्रा पर गए बिसौली के 87 यात्रियों में से 47 गुरुवार तड़के सकुशल लौट आए। 40 यात्री अब भी केदारनाथ के पास फंसे हुए हैं। वहां के हालात अभी अच्छे नहीं है। रास्ता बंद है। यात्रियों की दो बस और इनोवा कार रास्ते में फंसी है।
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फंसे हुए लोगों को घर वापसी की चिंता सता रही है। वापस लौटे यात्री अपने परिजनों से मिलकर फफक कर रो पडे़। मौत को बेहद करीब से देखने वाले तीर्थ यात्री अब भी सहमे हुए हैं। कुदरत का रौद्ररूप उनकी आंखों में तैर रहा है।

नगर के किराना व्यवसायी गौरव वार्ष्णेय, अजय वार्ष्णेय, प्रकाश वार्ष्णेय, देवेश गुप्ता और गांव मई के पूर्व प्रधानाचार्य जयप्रकाश मिश्र, उनकी पत्नी शांति मिश्रा, शिक्षक सुबोध मिश्र, उनकी पत्नी स्नेहलता और दो बच्चे, साईंकॉलोनी के दीनानाथ शर्मा अपनी पत्नी, बच्चों सहित चारधाम की यात्रा पर छह जून को गए थे।
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इस जत्थे में 40 यात्री शामिल थे। वापस लौटते समय जब जल प्रलय हुआ तब तक यह जत्था बद्रीनाथ से निकल कर जोशीमठ पहुंच गया था। उस वक्त का खौफनाक मंजर बयां करते समय गौरव वार्ष्णेय का शरीर कांपने लगा।

वह बोले, रविवार की शाम वे सभी वहां फंस गए। रातभर गाड़ी में रहे। सोमवार की सुबह जलप्रलय का परिणाम देखा तो सिहर गए। वहां सब कुछ तबाह हो गया था। सड़कें टूट गईं। सुबह पहाड़ी पर चढ़ गए। पानी में लाशें, गाड़ी, सिलेंडर आदि बहते हुए देख कर रूह कांप रही थी।

गौरव ने बताया कि बारिश थमी तो उन्हें एक भला आदमी मिल गया। उसने बहुत सहायता की। वह पहाड़ों के 40 किलोमीटर दुर्गम रास्ते से होते हुए सभी यात्रियों को सकुशल निकाल कर मुख्य मार्ग पर ले आया।

रास्ते में बिना कुछ खाए-पिए सब चलते रहे। बच्चों का बुरा हाल था। सभी एक दूसरे की मदद कर दुर्गम रास्तों पर चलते हुए आगे बढ़ रहे थे। गुरुवार तड़के सभी जब अपने घर पहुंचे तो परिवार वालों से मिलकर रो पडे़। परिजन भी उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

अभी फंसे हैं 40 यात्री
नगर से चारधाम की यात्रा पर गए चालीस लोगों का एक जत्था अभी वहां बद्रीनाथ के पास फंसा हुआ है। यह लोग एक मिलिट्री कैंप में शरण लिए हुए हैं। सभी को घर आने की चिंता सता रही है। यहां उनके परिवार वालों का बुरा हाल हैं।
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