तकनीकी शिक्षा को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को सौंपे जाने के कारण दशकों से चल रहे पीजीडीएम कॉलेजों (प्रबंधन संस्थान) की स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) को खतरा पैदा हो गया है।
अब कॉलेजों का उनके कोर्स, फीस और परीक्षा पर से नियंत्रण खत्म हो सकता है, जिससे गुणवत्ता और प्लेसमेंट प्रभावित होगा।
प्रबंधन संस्थानों के संगठन एजुकेशनल प्रमोशन सोसायटी फॉर इंडिया (ईपीएसआई) की ओर से सोमवार को मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. एमएम पल्लम राजू से मुलाकात कर इस मुद्दे की खिलाफत की जाएगी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2013 के आदेश के बाद तकनीकी और प्रबंधन शिक्षा, ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) की जगह यूजीसी के अधिकार क्षेत्र में आ गई है।
इस बदलाव से यूनिवर्सिटी और अधिकांश इंजीनियरिंग कॉलेज खुश हैं लेकिन पीजीडीएम संस्थान इसके सख्त खिलाफ हैं।
ग्रेटर नोएडा स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (बिमटेक) के निदेशक और ईपीएसआई के वैकल्पिक अध्यक्ष डॉ. हरिवंश चतुर्वेदी की अगुवाई में प्रबंधन संस्थानों के प्रतिनिधि सोमवार को एमएचआरडी मिनिस्टर से मुलाकात करेंगे।
डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि सोमवार की बैठक के बाद इस मामले के खिलाफ 28 दिसंबर को प्रबंधन संस्थानों की देशव्यापी बैठक बुलाई गई है।
पीजीडीएम संस्थानों को यूजीसी के अधिकार में नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने अपील की है कि इंजीनियरिंग कॉलेजों को भी इसका विरोध करने की जरूरत है।