नोएडा में पिछले कुछ वर्षों की अपेक्षा इस बार डेंगू के डंक का असर ज्यादा रहा। 2012 में जहां डेंगू के 14 मरीज मिले थे, वहीं इस साल इनकी संख्या दस गुना बढ़कर 156 पहुंच गई है।
इसके इतर शहर के निजी अस्पतालों से अभी 1200 संभावित डेंगू के मरीजों के एनसीडीसी भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट नहीं मिली है।
शहर में सात एक्यूट वायरल सिंड्रोम के मरीजों की मौत हो चुकी है। जिनमें पांच मरीजों की मौत कैलाश अस्पताल में और दो मरीजों की मौत फोर्टिस अस्पताल में हुई थी।
इन मरीजों के प्लेटलेट्स काउंट्स दस हजार के नीचे चले गए थे और कई को खून की उल्टियां भी हुई थीं। सितंबर माह से अब तक जिला अस्पताल में 99 मरीजों में डेंगू की पुष्टि की गई है।
जिनमें से 43 मरीजों की पुष्टि कार्ड रीडर पर हुई है। इसके बाद अस्पताल में एलाइजा मशीन पहुंचने पर 56 मरीजों की पुष्टि एलाइजा रीडर पर की गई।
दूसरी तरफ, ईएसआई के डॉ. सुनील देशपांडे ने बताया कि अस्पताल में अब तक दो सौ से अधिक डेंगू संभावित मरीज भर्ती हुए थे। जिनमें से 57 मरीजों में डेंगू की पुष्टि की गई है।
घातक वायरस का डेंगू अब तक कर रहा परेशान
कैलाश अस्पताल में वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एके शुक्ला ने बताया कि अक्तूबर के मध्य में डेंगू के गंभीर रोगी ज्यादा संख्या में आ रहे हैं।
हल्की बारिश जारी रहने से डेंगू के मरीजों की संख्या उतनी तेजी से नहीं घटी है जितनी उम्मीद की जा रही थी। इन दिनों आने वाले मरीजों में डेंगू के गंभीर वायरस के लक्षण मिल रहे हैं। जिसमें मरीज के प्लेटलेट्स तेजी से घटते हैं।
1200 से अधिक सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार
डेंगू का मर्ज वर्ष 2013 में एपीडेमिक (प्रकोप) हो गया है। जिला अस्पताल और ईएसआई से अलग निजी अस्पतालों में अब तक 1200 से अधिक मरीजों के सैंपल एनसीडीसी भेजे गए हैं। जिनकी रिपोर्ट का अब तक इंतजार है।