नोएडा में तीन साल पहले थाना सेक्टर-58 क्षेत्र से लापता महिला की हत्या उसके पति ने दहेज की मांग पूरी न होने के चलते कर दी थी।
गला घोंट कर हत्या करने के बाद शव को बोरे में भरकर सेक्टर-63 के नाले में फेंक दिया था। इसका खुलासा शुक्रवार को महिला के पति को गिरफ्तार कर महिला थाना पुलिस ने किया है।
मृतका के भाई व मां ने थाना सेक्टर-58 व बदायूं के थाने में अपहरण व हत्या का मुकदमा दर्ज करा रखा था। लेकिन पुलिस उन्हें टरकाती रही।
जानकारी के मुताबिक रजपुरा दिल्ली निवासी लक्ष्मण का विवाह कूबरी समसपुर बदायूं निवासी रामवीर की बहन मोहरकली से हुआ था।
विवाह के बाद दोनों नोएडा केवाजिदपुर गांव में किराए पर कमरा लेकर रहने लगे और सेक्टर-58 क्षेत्र में पराठे की दुकान लगाने लगे। नवंबर 2010 में अचानक मोहरकली लापता हो गई।
परिजनों ने उसके लापता होने के पीछे लक्ष्मण का हाथ मानते हुए थाना सेक्टर-58 में दहेज उत्पीड़न की शिकायत की, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया।
मोहरकली की मां ने बदायूं की अदालत के माध्यम से दामाद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। वहीं रामवीर की याचिका पर थाना सेक्टर-58 पुलिस ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज किया।
बदायूं पुलिस ने मामले को नोएडा भेज दिया। जबकि नोएडा पुलिस घटनास्थल बदायूं का बताते हुए अपने यहां दर्ज मामले की जांच बदायूं भेज दी। मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
तीन साल बाद फिर रामवीर ने पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई। महिला थाना पुलिस ने इस मामले में सवाल-जवाब शुरू किया।
थाना प्रभारी लक्ष्मी सिंह चौहान ने मामले की जांच नए सिरे से शुरू की और आरोपी लक्ष्मण को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
पूछताछ में वह टूट गया और बताया कि उसने अपने साथी छत्रपाल के साथ मिल कर मोहरकली की गला घोंट कर हत्या के बाद शव को बोरे में भर नाले में फेंक दिया था।
इस खुलासे के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब फरार छत्रपाल की तलाश कर रही है। गिरफ्तार लक्ष्मण के मुताबिक उसे पत्नी के चरित्र पर शक था।
पुलिस की लापरवाही
पत्नी के लापता होने की सूचना लक्ष्मण ने थाना सेक्टर-58 पुलिस को दी। बहन के लापता होने के पीछे जीजा का हाथ होने की आशंका के चलते दहेज उत्पीड़न की शिकायत रामवीर ने थाना सेक्टर-58 पुलिस को दी।
मां वीरमती ने दामाद पर बेटी की हत्या कर शव गायब करने का मामला बदायूं में दर्ज कराया। तीनों ही मामले के केंद्र में लापता मोहरकली की सुध लेने की कोशिश न तो नोएडा पुलिस ने की न ही बदायूं पुलिस ने।
केवल कागजी कार्रवाई चलती रही। रामवीर के मुताबिक उल्टा उसकी बहन के चरित्र पर शक करते हुए कहीं चले जाने की बात कह कर पुलिस मामले को दबाती रही।
बदायूं में सीओ ने तफ्तीश के आदेश नोएडा पुलिस को भेजे लेकिन केस डायरी नहीं भेजी। अब नए सिरे से जांच शुरू हुई तो दोनों केस डायरी पढ़ने के बाद नए सिरे से विवेचना की गई और केस खुल गया।
साक्ष्य के नाम पर पुलिस खाली
हत्या का खुलासा करने वाली पुलिस के पास केवल गिरफ्तार पति लक्ष्मण का इकबालिया बयान है, जिसके आधार पर मोहरकली की गुमशुदगी हत्या में तब्दील की गई।
पुलिस ने शव की तलाश में लक्ष्मण के बताए स्थान पर खोजबीन की। उसे न तो कोई कंकाल मिला न किसी तरह का अवशेष। ऐसे में अदालत में यह केस कितना टिक पाएगा यह देखना महत्वपूर्ण होगा। परिस्थितिजन्य साक्ष्य के नाम पर भी पुलिस के पास कुछ नहीं है।