तकनीकी शिक्षा को यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के अधिकार क्षेत्र में दिए जाने का विरोध करने के लिए सोमवार को पीजीडीएम संस्थानों के संगठन ने मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. एमएम पल्लम राजू से मुलाकात की।
एजुकेशनल प्रमोशन सोसायटी फॉर इंडिया (ईपीएसआई) से बैठक के बाद अब देशभर के संस्थानों को 31 दिसंबर तक यूजीसी की ओर से जारी गाइडलाइन पर फीडबैक देने का समय दिया गया है।
इसके साथ ही अब पीजीडीएम संस्थानों का संगठन ईपीएसआई देश भर के कॉलेजों के साथ मिलकर यूजीसी के खिलाफ माहौल बनाते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे, ताकि उनकी स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) प्रभावित न हो।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2013 के आदेश के बाद तकनीकी शिक्षा यूजीसी के अधिकार क्षेत्र में आ गई है। यूजीसी ने देश के लगभग 13 हजार तकनीकी संस्थानों के लिए 5 दिसंबर को रेगुलेशन बनाते हुए गाइड लाइन जारी कर दीं।
इस पर बिना किसी प्रचार-प्रसार के 12 दिसंबर तक फीडबैक भी ले लिया गया। इसके विरोध में ईपीएसआई ने एमएचआरडी मिनिस्टर से मुलाकात की।
ईपीएसआई के वैकल्पिक अध्यक्ष और बिमटेक ग्रेटर नोएडा के निदेशक डॉ. हरिवंश चतुर्वेदी की अगुवाई में 12 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल इस बैठक में शामिल हुआ।
डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि बैठक में मुद्दा उठाया गया कि इतने बड़े स्तर पर होने वाली पॉलिसी बदलाव के लिए कॉलेजों की राय ली जानी चाहिए और इस पर बातचीत के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।
बैठक के बाद एमएचआरडी ने देश भर के कॉलेजों को 31 दिसंबर तक इस रेगुलेशन पर फीडबैक देने का समय दिया है। अब ईपीएसआई अगले तीन हफ्तों में पुणे, बंगलूरू, चैन्नई, हैदराबाद और भुवनेश्वर समेत कई शहरों में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर बैठक कर इस मुद्दे पर रिपोर्ट तैयार कर जनवरी में एमएचआरडी को सौंपेगी।
दरअसल, दशकों से संचालित पीजीडीएम कॉलेजों (प्रबंधन संस्थान) की स्वायत्तता (ऑटोनोमी) को यूजीसी से खतरा पैदा हो गया है। इसमें कॉलेजों का उनके कोर्स, फीस और परीक्षा पर से नियंत्रण खत्म हो सकता है।