नोएडा के डिग्री कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में नामांकन के तुरंत बाद सिफारिश के बीच जोड़ तोड़ की राजनीति शुरू हो गई और देर शाम तक चेहरे-मोहरे बदल गए।
सुबह तक ढोल नगाड़ों के साथ पैनल में जो चेहरे शामिल थे, नामांकन के बाद वो नए नामों में तब्दील हो गए।
उम्र के पेंच में फंसे अध्यक्ष पद के एक प्रत्याशी का नामांकन रद्द होने से बचाने के लिए एक विधायक ने सिफारिश तक कर डाली तो निर्दलियों ने भी जुगाड़ की राजनीति में एनएसयूआई से टिकट लेने के लिए कांग्रेस अधिकारियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया।
नामांकन में एनएसयूआई को छोड़कर बाकी दलों ने अपने पैनल में तब्दीली की। हर दल एक दूसरे को गुमराह करने की शरारत भरी राजनीति करता नजर आया।
यही वजह थी कि पैनल के चेहरे कुछ और थे और नामांकन के नाम कुछ और। खासतौर से एबीवीपी अपने पैनल के साथ खुलकर सामने नहीं आया।
इसके अलावा दो प्रमुख दलों ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे, तो तीसरी दल ने भी ओपना प्रत्याशी बदल कर वोट बैंक के लिए यही दाव खेला।
अध्यक्ष पद के लिए एक प्रत्याशी की उम्र ज्यादा होने के कारण उसका नामांकन रद्द होगा। ऐसा होने पर गुर्जर वोट बंटने से बच जाएंगे, जिसको भुनाने की कोशिश सपा छात्र सभा करेगी।
हालांकि इस प्रत्याशी का नामांकन बचाने के लिए विधायक की सिफारिश भी पहुंची है, शुक्रवार को भी और सिफारिशें आने की उम्मीद है लेकिन नामांकन रद्द ही होगा।
इस प्रत्याशी का नामांकन रद्द होता देख संबंधित दल ने अपने नए प्रत्याशी का पर्चा भरवा दिया। छात्रसंघ का चुनाव अब पूरी तरह नामांकन के क्लियर होने पर टिका है। दो संगठनों के पास बैकअप है तो दो को संभलने का मौका नहीं मिलेगा।