यदि आप गुलदान रखने के शौकीन हैं और कांच या मिट्टी के गुलदान के टूटने फूटने की दिक्कत से बचना चाहते हैं, तो कागज के गुलदान खरीदकर अपने ड्रॉइंग रूम को सजा सकते हैं।
इसके अलावा कागज के बने सैकड़ों अन्य उत्पाद भी शिल्प मेले में उपलब्ध हैं। दिवाली के अलावा बाकी त्योहारों में घर सजाने के लिए शिल्प मेला सजावट से उत्पादों से अटा पड़ा है।
गुलदान के अलावा कागज के बने कैंडल स्टैंड, ज्वेलरी बॉक्स, वॉल पेपर और पेन होल्डर्स जैसे तमाम उत्पादों को बेहद खूबसूरत नक्काशी के साथ तराश कर पेश किया गया है।
स्टॉल नंबर 134 के शिल्पकार अल्ताफ हुसैन खान बताते हैं कि ये उत्पाद कागज से बने जरूर है, लेकिन बहुत मजबूत हैं। गिरने पर टूटेंगे नहीं और गंदा होने पर धुल भी सकते हैं।
इसी तरह अगर आप विंड चैम के शौकीन हैं तो मिट्टी के बने चैम भी शिल्पोत्सव में उपलब्ध है। अन्य चैम की तरह इनकी आवाज भी बड़ी मधुर है। मिट्टी के फ्लावर वेस, लैंप, पोट्स पेन स्टैंड जैसे अनेकों उत्पादों के स्टॉल सजे हैं।
दिल्ली-यूपी सीमा के चक्कर में शिल्पकार परेशान
शिल्पोत्सव में दिल्ली से आने वाले शिल्पियों की तादात ज्यादा है। कनॉट प्लेस में लगे मेगा उत्सव से शिल्पी यहां आए हैं।
यहां आने में सबसे ज्यादा दिक्कत परिवहन के अभाव से हुई। साथ ही इनको अपना उत्पाद लाने में भी काफी दिक्कत हुई।
शिल्पकार अल्ताफ हुसैन खान ने बताया कि लोडर वाहन पुलिस के डर से दिल्ली से नोएडा आने को तैयार नहीं हो रहे थे। खुद की कार से कई बार चक्कर लगाने पड़े। एक अन्य शिल्पकार नितिन भी इसी तरह की परेशानी से जूझे।
मेले में असुविधा से परेशान
शिल्प मेले का एक ब्लॉक ऐसा है, जहां आने-जाने के लिए कालीन नहीं बिछाई गई है। जबकि लाल मिट्टी डाल दी गई है।
इससे स्टॉल के सामने ग्राउंड तो ऊंचा हो गया है, लेकिन स्टॉल नीचे हो गई है। शिल्पकारों का कहना है कि मौसम खराब है। ऐसे में यदि बारिश हो गई तो सारे उत्पाद खराब हो सकते हैं।