नोएडा प्राधिकरण ने आवासीय और औद्योगिक संपत्ति पर मिक्स लैंड यूज पॉलिसी को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। 24 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़क पर स्थित संपत्तियों के आवंटी ही इसका लाभ ले सकेंगे।
प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण ने बताया कि आवासीय क्षेत्र में मिक्स लैंड यूज पॉलिसी का लाभ पाने के लिए आवंटी को उस सेक्टर के आवासीय और व्यावसायिक भू-दर के बीच के अंतर का 50 फीसदी एकमुश्त जमा करना होगा।
आवंटी आवासीय क्षेत्र में गेस्ट हाउस के लिए इतनी धनराशि का भुगतान कर तय फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) का पूरा इस्तेमाल कर सकेगा।
इसी तरह औद्योगिक सेक्टरों में मिक्स लैंड यूज का लाभ पाने के लिए उस सेक्टर के व्यावसायिक और औद्योगिक भू-दर के बीच के अंतर का 50 फीसदी शुल्क लगेगा।
इसके बाद ही आवंटी उस औद्योगिक संपत्ति के लिए तय एफएआर का 25 फीसदी हिस्सा व्यावसायिक गतिविधि के लिए इस्तेमाल कर सकेगा। यह छूट सिर्फ संपत्ति के भूतल पर ही मिलेगी। इस ढील से औद्योगिक सेक्टरों में ऑटो-शोरूम, एटीएम, सर्विस सेंटर और डिस्प्ले सेंटर आदि खुल सकेंगे।
दोनों ही स्थिति में पार्किंग की पर्याप्त सुविधा होने का साक्ष्य भी देना होगा। अब इस पर आपत्ति मांगी जाएगी। उन आपत्तियों का निस्तारण करते हुए नियमावली तैयार होगी।
उसके हिसाब से मास्टर प्लान 2031 में भी संशोधन होगा, तब जाकर यह लागू होगी। अभी इसके लिए लागू करने की समयसीमा तय नहीं की गई है। प्रेसवार्ता में डीसीईओ विजय यादव व राजेश प्रकाश, ओएसडी मनोज राय भी अधिकारी शामिल रहे।
संकट के उबारने का तरीका
मालूम हो कि करीब दो साल पहले सेक्टर-19 में बैंक समेत अन्य स्थानों पर कमर्शियल गतिविधियों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
प्राधिकरण ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया था कि आवासीय सेक्टर में कमर्शियल गतिविधियां चलाने के लिए कोई नीति नहीं है। कोर्ट के आदेश पर बैंक बंद करने पड़े थे।
हालांकि प्राधिकरण ने बाद में योजना निकालकर बैंकों को जगह दी थी। तभी से शहर के लोग मिक्स लैंड यूज करने की मांग कर रहे थे।
सबसे अधिक दबाव उद्यमी संगठन एनईए और फेडरेशन और इंडस्ट्री की तरफ से दिया जा रहा था। प्राधिकरण ने लोगों की मांगों को देखते हुए बोर्ड बैठक में निर्णय लिया है।